Edited By Mehak,Updated: 16 Mar, 2026 06:24 PM

असम की राजनीति ने 1950 से 2026 तक कई बदलाव देखे हैं। राज्य के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई थे, जिन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। लंबे समय तक कांग्रेस का शासन रहा, जबकि बाद में क्षेत्रीय दल असम गण परिषद का उदय हुआ।...
नेशनल डेस्क : असम की राजनीति स्वतंत्रता के बाद से कई बदलावों से गुजरी है। राज्य में अलग-अलग दौर में विभिन्न नेताओं ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और प्रशासन, विकास तथा राजनीतिक दिशा को प्रभावित किया। शुरुआती वर्षों में जहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रभाव रहा, वहीं बाद में क्षेत्रीय दलों और हाल के वर्षों में भारतीय जनता पार्टी ने भी राज्य की राजनीति में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
शुरुआती दौर में कांग्रेस का प्रभाव
स्वतंत्रता के बाद असम में कांग्रेस का लंबा शासन रहा। असम के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई थे, जिन्होंने 1946 से 1950 तक राज्य का नेतृत्व किया और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके बाद बिष्णुराम मेधी (1950–1957) मुख्यमंत्री बने।
इसके बाद बिमला प्रसाद चालिहा ने 1957 से 1970 तक लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद संभाला और शिक्षा व बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया। 1970 से 1972 के बीच महेंद्र मोहन चौधरी मुख्यमंत्री रहे, जबकि 1972 से 1978 तक सरत चंद्र सिन्हा ने राज्य की कमान संभाली और ग्रामीण विकास योजनाओं को बढ़ावा दिया।
क्षेत्रीय राजनीति और राजनीतिक अस्थिरता का दौर
1978 के बाद असम की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिले। गोलाप बोरबोरा 1978 में राज्य के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। उनके बाद जोगेंद्र नाथ हजारिका का कार्यकाल काफी छोटा रहा। 1980 में अनवरा तैमूर असम की पहली और अब तक की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद हितेश्वर सैकिया ने दो अलग-अलग कार्यकाल (1983–1985 और 1991–1996) में राज्य का नेतृत्व किया। इस दौरान असम आंदोलन के बाद उभरे क्षेत्रीय दल असम गण परिषद के नेता प्रफुल्ल कुमार महंता 1985 से 1990 और फिर 1996 से 2001 तक मुख्यमंत्री रहे।

तरुण गोगोई का लंबा कार्यकाल
2001 में कांग्रेस नेता तरुण गोगोई मुख्यमंत्री बने और उन्होंने लगातार तीन कार्यकाल (2001–2016) तक राज्य का नेतृत्व किया। उनके शासन में आर्थिक विकास, निवेश और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई पहल की गईं।
भाजपा का उदय और वर्तमान नेतृत्व
2016 में असम की राजनीति में बड़ा बदलाव आया जब भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार राज्य में सरकार बनाई। सर्बानंद सोनोवाल 2016 से 2021 तक मुख्यमंत्री रहे और उनके कार्यकाल में विकास परियोजनाओं तथा प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया गया।

2021 में हिमंत बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री बने और 2026 तक राज्य की कमान संभाल रहे हैं। उनके नेतृत्व में कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है।