Newborn Screening Test: नवजात के लिए बेहद अहम टेस्ट! मां-बाप ने नहीं कराया तो पड़ सकता है भारी

Edited By Updated: 07 Jan, 2026 03:55 PM

why is nbs test necessary for a newborn baby

माता-पिता बनना दुनिया का सबसे सुखद अहसास है लेकिन इसके साथ आती है एक नन्ही जान की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी। अक्सर बच्चा जन्म के समय देखने में बिल्कुल स्वस्थ और सामान्य लगता है लेकिन कुछ बीमारियां शरीर के अंदर छिपी हो सकती हैं जो समय के साथ गंभीर...

Newborn Screening Test : माता-पिता बनना दुनिया का सबसे सुखद अहसास है लेकिन इसके साथ आती है एक नन्ही जान की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी। अक्सर बच्चा जन्म के समय देखने में बिल्कुल स्वस्थ और सामान्य लगता है लेकिन कुछ बीमारियां शरीर के अंदर छिपी हो सकती हैं जो समय के साथ गंभीर रूप ले लेती हैं। इन्हीं खतरों को समय रहते पहचानने के लिए न्यू बॉर्न स्क्रीनिंग (NBS) टेस्ट को आज के दौर में अनिवार्य माना जा रहा है।

जन्म के शुरुआती 1,000 मिनट: सबसे महत्वपूर्ण समय

एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चे के जन्म के बाद के पहले 1,000 मिनट (लगभग 16 से 17 घंटे) सबसे नाजुक होते हैं। इस दौरान की गई स्क्रीनिंग से उन जेनेटिक और मेटाबॉलिक बीमारियों का पता चल जाता है जिनके लक्षण बाहर से नजर नहीं आते। यदि कोई समस्या शुरुआती घंटों में पकड़ में आ जाए तो डॉक्टर तुरंत इलाज शुरू कर सकते हैं जिससे बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास (Growth) पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।

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डरावने आंकड़े और भारत की स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि नवजात शिशुओं की सुरक्षा में थोड़ी सी भी चूक भारी पड़ सकती है। दुनिया भर में हर दिन करीब 6,500 नवजात बच्चों की मृत्यु हो जाती है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों की कुल मौतों में 47% हिस्सा केवल नवजात शिशुओं का होता है। भारत में भी शिशु मृत्यु दर एक बड़ी चुनौती है। जागरूकता की कमी के कारण कई पेरेंट्स स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं करवाते जिसका खामियाजा बच्चे को ताउम्र भुगतना पड़ सकता है।

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NBS टेस्ट से किन बीमारियों का चलता है पता?

यह एक साधारण रक्त परीक्षण (Blood Test) होता है जिसके जरिए कई गंभीर समस्याओं की पहचान की जा सकती है:

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बीमारी का नाम प्रभाव
हाइपोथायरायडिज्म मानसिक विकास में कमी और ग्रोथ रुकना।
गैलेक्टोसेमिया दूध को पचाने में दिक्कत, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।
G6PD की कमी खून की कमी (एनीमिया) और पीलिया का खतरा।
सुनने की क्षमता जन्मजात बहरापन, जिसका इलाज शुरुआती महीनों में ही संभव है।
हार्ट डिजीज जन्मजात दिल की बीमारियां जो जानलेवा हो सकती हैं।

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पेरेंट्स के लिए सलाह: लापरवाही न करें

ज्यादातर मामलों में पेरेंट्स सोचते हैं कि "बच्चा तो ठीक दिख रहा है, टेस्ट की क्या जरूरत?" लेकिन ध्यान रहे निओनेटल स्क्रीनिंग (Neonatal Screening) भविष्य की सुरक्षा का एक बीमा है। सही समय पर किया गया यह छोटा सा टेस्ट आपके बच्चे को शारीरिक और मानसिक विकलांगता से बचाकर एक स्वस्थ और लंबा जीवन दे सकता है।

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