Edited By Parveen Kumar,Updated: 05 Jan, 2026 07:11 PM

हवाई यात्रा करने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारत के एविएशन रेगुलेटर DGCA ने फ्लाइट से जुड़े नियमों में सख्ती करते हुए पावर बैंक के इस्तेमाल पर नए प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। अब यात्री विमान के अंदर बैठकर पावर बैंक की मदद से मोबाइल या...
नेशनल डेस्क: हवाई यात्रा करने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारत के एविएशन रेगुलेटर DGCA ने फ्लाइट से जुड़े नियमों में सख्ती करते हुए पावर बैंक के इस्तेमाल पर नए प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। अब यात्री विमान के अंदर बैठकर पावर बैंक की मदद से मोबाइल या किसी भी अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को चार्ज नहीं कर सकेंगे। यह फैसला दुनियाभर में लिथियम बैटरी से जुड़ी आग और ओवरहीटिंग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लिया गया है।
DGCA ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एयरलाइंस, यात्रियों और एयरपोर्ट्स- तीनों की जिम्मेदारियां तय की हैं। नियामक के अनुसार, लिथियम बैटरियां बेहद संवेदनशील होती हैं और ज्यादा गर्म होने पर इनमें आग लगने का खतरा रहता है। पावर बैंक, पोर्टेबल चार्जर और अन्य बैटरी से चलने वाले उपकरण फ्लाइट के दौरान गंभीर सुरक्षा जोखिम बन सकते हैं। ओवरचार्जिंग, बैटरी का पुराना होना या मैन्युफैक्चरिंग में खामी आग की बड़ी वजह बन सकती है। कई मामलों में लिथियम बैटरी की आग खुद ही जलती रहती है, जिसे बुझाना बेहद मुश्किल होता है।
नए नियमों के तहत पावर बैंक और स्पेयर बैटरियों को केवल हैंड बैगेज में रखने की अनुमति होगी। DGCA ने स्पष्ट किया है कि इन्हें ओवरहेड स्टोरेज में नहीं रखा जा सकेगा। इसकी वजह यह है कि ऊपर रखे बैग में आग लगने की स्थिति में उसे तुरंत पहचानना और काबू में करना कठिन हो जाता है, जबकि सीट के पास होने पर केबिन क्रू और यात्री धुआं, गर्मी या जलने की गंध को जल्दी महसूस कर सकते हैं।
एयरलाइंस को अपनी सेफ्टी जांच और रिस्क असेसमेंट और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। केबिन क्रू को लिथियम बैटरी से जुड़ी घटनाओं के शुरुआती संकेत- जैसे डिवाइस का ज्यादा गर्म होना, धुआं निकलना या आग लगना- पहचानने की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि विमान में फायर फाइटिंग उपकरण और सुरक्षा संसाधन हर समय तैयार हालत में हों।
नए दिशा-निर्देशों में यात्रियों की भूमिका भी अहम मानी गई है। फ्लाइट के दौरान किसी भी डिवाइस से जुड़ी असामान्य गंध, धुआं या अत्यधिक गर्मी महसूस होने पर यात्रियों को तुरंत केबिन क्रू को सूचना देनी होगी। वहीं एयरपोर्ट्स को टर्मिनल, चेक-इन काउंटर और बोर्डिंग गेट पर सुरक्षा से जुड़ी चेतावनियां प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। DGCA का कहना है कि बढ़ती हवाई यात्राओं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सुरक्षा तभी सुनिश्चित की जा सकती है, जब यात्री, एयरलाइंस और एयरपोर्ट- सभी मिलकर नियमों का पालन करें।