Edited By Radhika,Updated: 25 Mar, 2026 06:16 PM

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच भारत सरकार ने देशवासियों के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया कि देश में रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अब घर-घर पाइप से गैस...
नेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच भारत सरकार ने देशवासियों के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया कि देश में रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अब घर-घर पाइप से गैस पहुँचाने के अभियान को तेज कर रही है। सुजाता शर्मा ने बताया कि नए PNG कनेक्शन लेने वालों के लिए सिक्योरिटी फीस पूरी तरह माफ कर दी गई है। इसके साथ ही, नए उपभोक्ताओं को 500 रुपये तक की मुफ्त गैस भी दी जा रही है। दिल्ली में काम को गति देने के लिए 'रोड रेस्टोरेशन चार्ज' हटा लिया गया है और अब पाइपलाइन बिछाने का काम दिन-रात (24x7) चल सकेगा। पिछले 25 दिनों में ही देश में 2.5 लाख नए कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं।
LPG की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन
एलपीजी की आपूर्ति को लेकर उड़ रही अफवाहों के बीच सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए 24 मार्च को विभिन्न राज्यों में 2700 ठिकानों पर छापेमारी की। इसमें उन्होंने अवैध रूप से रखे गए 2000 सिलेंडर जब्त किए गए। मंत्रालय ने साफ किया कि घरेलू गैस की सप्लाई पर्याप्त है और लोग पैनिक बुकिंग से बचें। कल हुई कुल बुकिंग में से 92% ऑनलाइन थीं, जो व्यवस्था की पारदर्शिता को दर्शाता है।
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रिफाइनिंग क्षमता और बैकअप
ईंधन सुरक्षा पर अपडेट देते हुए उन्होंने बताया कि भारत की रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। देश के पास वर्तमान में 26 करोड़ टन रिफाइनिंग क्षमता है, जो किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त है। साथ ही, 26 राज्यों को 22 लाख टन कमर्शियल एलपीजी आवंटित की गई है।
पीएम मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार संपर्क में हैं। 24 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन कर वैश्विक स्थितियों और विशेष रूप से Shipping Lines की सुरक्षा पर चर्चा की। इसके अलावा, श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भी प्रधानमंत्री से बात की। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के राजदूत से मुलाकात कर पश्चिम एशिया के संघर्षों पर विचार-विमर्श किया।