Edited By ,Updated: 07 Feb, 2016 03:10 PM

उद्योग एवं वाणिज्य संगठन एसोचैम ने नौकरीपेशा परिवारों की मदद करने एवं कार्यबल में अधिक से अधिक संख्या में
नई दिल्लीः उद्योग एवं वाणिज्य संगठन एसोचैम ने नौकरीपेशा परिवारों की मदद करने एवं कार्यबल में अधिक से अधिक संख्या में जुडऩे के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित करने के मद्देनजर वित्त मंत्री अरुण जेतली से आगामी बजट में क्रेशों को कर में छूट देने तथा बाल शिक्षा भत्ता 10 गुणा बढ़ाने का सुझाव दिया है।
एसोचैम ने बजट पूर्व सुझाव में जेतली से कहा है कि उपभोक्ता मांग को पुन: मजबूत बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए ताकि निवेश और रोजगार में वृद्धि हो सके। उसने कहा, "हमें यकीन है कि करदाताओं के हाथों में अधिक पैसा रहने देने के लिए सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे लेकिन महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बजट में उनके लिए विशेष प्रस्ताव किए जाने की जरूरत है।"
संगठन ने अपने सुझाव में कार्यस्थलों पर क्रेशों के लिए कर में छूट पर जोर देते हुए कहा कि विभिन्न व्यावसायिक क्रेशों के लिए भी रियायत की व्यवस्था होनी चाहिए। उसने हर बच्चे के लिए 2500 रुपए प्रति माह बाल शिक्षा भत्ता के तहत देने की भी मांग की।
संगठन ने कहा, "परिवार की आय को बढ़ाने के लिए अधिक महिलाएं नौकरी करने लगी हैं। छोटे परिवारों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर कामकाजी महिलाओं को बच्चों के पालन-पोषण में काम के वक्त मदद की जरूरत होती है। अत: कार्यबल में महिलाओं की संख्या में बढ़ौतरी को प्रोत्साहित करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है।"
एसोचैम ने आर.बी.आई. की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर बढ़ते खर्च के कारण परिवारों की खराब होती स्थिति को कई बार उठाया है। खासकर नौकरीपेशा परिवारों की स्थिति इस मामले में अधिक खराब है। अत: इसे ध्यान में रखते हुए बाल शिक्षा भत्ता निश्चित तौर पर बढ़ाना चाहिए तथा स्वास्थ्य बीमाओं के माध्यम से इसपर होने वाले खर्च को भी उदार बनाना चाहिए।
उसने कहा, "बाल शिक्षा भत्ता वित्त वर्ष 1988-89 के आधार पर ही दिए जा रहे हैं जो मौजूदा स्कूल फीस के मुकाबले बेहद कम है। छात्रावास व्यय भत्ता भी वित्त वर्ष 1988-89 में ही तय किया गया था।" संगठन ने कहा कि चिकित्सा भत्ता के साथ भी यही स्थिति है। यह 17 साल पहले तय किया गया था। अत: इसमें भी सुधार की आवश्यकता है। इसे अभी के 15 हजार रुपए प्रति माह से बढ़ाकर कम से कम 50 हजार रुपए प्रति माह किया जाना चाहिए। इसके अलावा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए भी विशेष प्रावधान किए जाने की जरूरत है।