BSE ने कई शेयरों पर कसा शिकंजा, सर्किट फिल्टर घटाए, आज से बदले ट्रेडिंग नियम

Edited By Updated: 22 May, 2026 01:10 PM

bse tightens grip on several stocks circuit filters lowered

शेयर बाजार में बढ़ती अस्थिरता और चुनिंदा स्मॉलकैप शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने बड़ा सर्विलांस कदम उठाया है। एक्सचेंज ने कई कम लिक्विडिटी वाले शेयरों के सर्किट फिल्टर घटा दिए हैं और निवेशकों को ट्रेड-टू-ट्रेड...

बिजनेस डेस्कः शेयर बाजार में बढ़ती अस्थिरता और चुनिंदा स्मॉलकैप शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने बड़ा सर्विलांस कदम उठाया है। एक्सचेंज ने कई कम लिक्विडिटी वाले शेयरों के सर्किट फिल्टर घटा दिए हैं और निवेशकों को ट्रेड-टू-ट्रेड (T2T) सेगमेंट से जुड़े नियमों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। यह फैसला 22 मई 2026 से लागू किया गया है।

BSE के अनुसार, जिन शेयरों में असामान्य तेजी, भारी सट्टेबाजी, कम लिक्विडिटी या अचानक ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ने जैसी गतिविधियां देखी जाती हैं, उन पर “प्राइस कंटेनमेंट मेजर्स” लागू किए जाते हैं। इसका उद्देश्य शेयरों में अनियंत्रित तेजी या गिरावट को रोकना और निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।

एक्सचेंज ने Autoline Industries का प्राइस बैंड 20 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। वहीं Candour Techtex का सर्किट 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया गया है। Jetmall Spices and Masala, Parsvnath Developers और Shoora Designs के सर्किट फिल्टर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिए गए हैं।

सर्किट फिल्टर किसी शेयर की एक दिन में अधिकतम बढ़त या गिरावट की सीमा तय करता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी शेयर पर 20 प्रतिशत का सर्किट लागू है तो उसकी कीमत एक कारोबारी दिन में अधिकतम 20 प्रतिशत तक ऊपर या नीचे जा सकती है लेकिन इसे घटाकर 5 प्रतिशत कर देने पर कीमतों की चाल सीमित हो जाती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सचेंज इस कदम के जरिए शेयरों की अत्यधिक वोलैटिलिटी पर नियंत्रण लगाने की कोशिश करता है।

BSE ने ट्रेड-टू-ट्रेड (T2T) सेगमेंट को लेकर भी निवेशकों को आगाह किया है। T2T में शामिल शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग की अनुमति नहीं होती। ऐसे शेयरों में खरीद-बिक्री केवल डिलीवरी आधार पर होती है, जिससे सट्टेबाजी पर रोक लगाई जा सके।

एक्सचेंज ने स्पष्ट किया कि किसी शेयर को T2T में शामिल करने या हटाने का निर्णय मार्केट कैपिटलाइजेशन, PE रेशियो, असामान्य मूल्य वृद्धि, वोलैटिलिटी और ट्रेडिंग वॉल्यूम जैसे कई मानकों के आधार पर लिया जाता है। बाजार जानकारों ने निवेशकों को सलाह दी है कि केवल तेज रैली देखकर निवेश करने से बचें और कंपनी के फंडामेंटल तथा जोखिम का आकलन करने के बाद ही फैसला लें।

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