धनतेरस पर बर्तन खरीदना पड़ेगा महंगा, बिक्री रहेगी सुस्त

Edited By Updated: 16 Oct, 2021 02:41 PM

buying utensils on dhanteras will be expensive sales will remain sluggish

कोरोना मामले थमने और टीकाकरण पर जोर से पिछले साल महामारी की भारी मार झेल चुके बर्तन उद्योग को इस साल कारोबार बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन बर्तन काफी महंगा होने से बेहतर कारोबार की उम्मीद धूमिल पड़ती दिख रही है। इस साल धनतेरस पर बर्तन खरीदना 40 से 50...

नई दिल्लीः कोरोना मामले थमने और टीकाकरण पर जोर से पिछले साल महामारी की भारी मार झेल चुके बर्तन उद्योग को इस साल कारोबार बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन बर्तन काफी महंगा होने से बेहतर कारोबार की उम्मीद धूमिल पड़ती दिख रही है। इस साल धनतेरस पर बर्तन खरीदना 40 से 50 फीसदी महंगा पड़ सकता है।

बर्तन बनाने में उपयोग होने वाले स्टील के दाम बढ़कर दोगुने हो गए हैं। बर्तन निर्माता भी मांग कमजोर पड़ने और स्टील की कीमतों में स्थिरता न रहने से कम ही बर्तन मंगा रहे हैं। थोक कारोबारी भी धनतेरस पर कम बिक्री के खटके में खरीदारी कम कर रहे हैं।

निर्माता और कारोबारी पुराना स्टॉक निकालने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। कोरोना के कारण बीते डेढ़ साल में बर्तनों की कम बिक्री होने से स्टॉक काफी पड़ा हुआ है। धनतेरस पर बर्तन खरीदना शुभ माने जाने से इनकी खूब बिक्री होती है। कोरोना से पहले दिल्ली में बर्तन का सालाना कारोबार 1,200 से 1,500 करोड़ रुपए था। बर्तन उद्योग के मुताबिक इस साल 600 से 700 करोड़ रुपए का ही कारोबार होने की उम्मीद है।    

दिल्ली में वजीरपुर बर्तन निर्माण का बड़ा केंद्र है। वजीरपुर के बर्तन निर्माता सतीश जैन ने कहा कि एक-डेढ़ साल पहले बर्तन में उपयोग होने वाला जो स्टील 200 से 225 रुपए किलो मिल रहा था, वो 400 से 450 रुपए किलो मिल रहा है। इससे बर्तन बनाने की लागत काफी बढ़ गई है। सबसे बड़ी दिक्कत स्टील की कीमतों में स्थिरता न होना है। जिससे खरीदार छिटक रहा है। धनतेरस से एक-डेढ़ महीने पहले कारखानों में 24 घंटे तक उत्पादन होता है लेकिन इन दिनों 8 घंटे ही कारखाने चल रहे हैं। बढ़ी लागत से निपटने के सवाल पर जैन कहते हैं कि लागत के अनुरूप दाम नहीं बढ़ा सकते और शून्य मार्जिन पर भी बिक्री करने पर लागत नहीं निकलेगी। ऐसे में नए बर्तन पर हो रहे घाटे की पूर्ति पुराने स्टॉक को बढ़े हुए दाम पर निकालने से हो पा रही है।

दिल्ली में डिप्टीगंज बर्तन का सबसे बड़ा थोक बाजार है और यहां 300 कारोबारी कारोबार करते हैं। जो दिल्ली ही नहीं अन्य राज्यों को भी बर्तन की आपूर्ति करते हैं। डिप्टीगंज स्टेनलेस यूटेंसिल्स ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर जैन कहते हैं कि  इस समय धनतेरस पर गिफ्ट देने के लिए कंपनियों की ओर से बर्तनों के भरपूर ऑर्डर मिलने चाहिए थे, लेकिन अभी बहुत कम ही आर्डर मिल रहे हैं। लागत बढ़ने से बर्तन के दाम 40 से 50 फीसदी बढ़ चुके हैं। जो 51 बर्तनों का डिनर सेट पिछले साल 3,500-4,000 रुपए में मिल रहा था, वो अब 5,000-5,500 रुपए में मिल रहा है। 400 से 500 रुपए में मिलने वाला 5 बर्तन का सेट 600 से 700 रुपए में मिल रहा है। कीमतों में बार बार बढ़ोतरी से भी खरीदार कम खरीदारी कर रहे हैं। इस साल सामान्य के मुकाबले 50 फीसदी ही बिक्री होने की संभावना है।

दिल्ली बर्तन महासंघ के महामंत्री मनमोहन ढींगरा कहते हैं कि पिछले साल कोरोना की मार से बर्तन कारोबार में 50 फीसदी गिरावट आई थी। इस साल गर्मियों में भी शादियों पर बंदिशों से बर्तन कम ही बिके। लेकिन बीते कुछ महीनों से हालत सुधरने से धनतेरस और आगे शादियों में बिक्री सामान्य कारोबार के 70 से 80 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद थी लेकिन कीमतों में 40 से 50 फीसदी वृद्धि से कारोबार बढ़ने की उम्मीद पर पानी फेर दिया। अभी तक के माहौल को देखते हुए लगता है कि धनतेरस पर हल्के वजन व कम कीमत के अलावा कम नग वाले बर्तनों के सेट ही बिकेंगे। ज्यादा बर्तनों वाले डिनर सेट कम ही बिकेंगे।

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