FPI Outflow: विदेशी निवेशकों का भारत से मोहभंग, जनवरी में निकाले 3 अरब डॉलर

Edited By Updated: 22 Jan, 2026 01:05 PM

foreign investors lose interest in india fpi outflows exceed 3 billion in janu

जनवरी 2026 में भारत के सूचीबद्ध शेयरों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली 3 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गई, जो अगस्त 2025 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह बिकवाली तब हुई जब दक्षिण कोरिया, ताइवान, इंडोनेशिया और थाईलैंड समेत कई अन्य उभरते...

बिजनेस डेस्कः जनवरी 2026 में भारत के सूचीबद्ध शेयरों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली 3 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गई, जो अगस्त 2025 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह बिकवाली तब हुई जब दक्षिण कोरिया, ताइवान, इंडोनेशिया और थाईलैंड समेत कई अन्य उभरते बाजारों में FPI शुद्ध खरीदार बने रहे।

निकासी के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, एफपीआई की निरंतर निकासी के पीछे तीन मुख्य वजहें हैं:

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कोई ठोस प्रगति नहीं।
  • कंपनियों की आय वृद्धि में सुस्ती।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शेयरों में वैश्विक तेजी में भारत की सीमित भागीदारी।

साथ ही, आम बजट से पहले नीतिगत बदलावों की सीमित संभावना ने भी निवेशकों को सतर्क कर रखा है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के शुरुआती नतीजों से यह चिंता और बढ़ गई है। शुरुआती नतीजे जारी करने वाली 143 कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ पिछले साल की तुलना में सिर्फ 3.5 फीसदी बढ़ा, जो वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में 11.2 फीसदी और वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में 10.1 फीसदी की वृद्धि से काफी कम है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण

मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों से आय वृद्धि मामूली रहने के कारण FPI चिंतित हैं। लंबी अवधि में डॉलर में भारत की आय वृद्धि सीमित रही है, जबकि बाजार एक साल के अग्रिम लाभ के लगभग 20 गुना पर कारोबार कर रहा है। इसके अलावा, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पिछले साल करीब 5 फीसदी कमजोर हुआ, जिससे विदेशी निवेशकों की चिंताएं और बढ़ीं।

बाजार में बिकवाली का अवसर

घरेलू इक्विटी निवेश में मजबूती के कारण विदेशी निवेशकों के पास बाहर निकलने के पर्याप्त अवसर बने और कीमतों में ज्यादा व्यवधान नहीं आया। अप्रैल 2025 में डोनॉल्ड ट्रंप द्वारा घोषित टैरिफ पर 90 दिनों का विराम कुछ समय के लिए राहत लेकर आया था और FPI ने मार्च से जून 2025 के बीच शुद्ध खरीदारी की। लेकिन व्यापार टकराव और भारत पर 50 फीसदी टैरिफ के खतरे ने विदेशी निवेशकों को फिर से बेचने के लिए प्रेरित किया। अगस्त 2025 के बाद के छह महीनों में चार महीनों में FPI शुद्ध बिकवाल रहे।

 

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