Edited By jyoti choudhary,Updated: 08 Oct, 2026 04:51 PM

आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने बृहस्पतिवार को सरकार से एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) पर 15 अक्टूबर से लागू होने वाले शुल्क को वापस लेने और डिजिटल भुगतान प्रणाली को व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रखने की
नई दिल्लीः आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने बृहस्पतिवार को सरकार से एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) पर 15 अक्टूबर से लागू होने वाले शुल्क को वापस लेने और डिजिटल भुगतान प्रणाली को व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रखने की मांग की।
जीटीआरआई ने कहा कि व्यापारियों से शुल्क लेने पर कीमतें बढ़ सकती हैं, छोटे कारोबारियों की कमाई पर असर पड़ सकता है और घरेलू मांग कमजोर हो सकती है। जीटीआरआई ने कहा कि शुल्क लगाए जाने से कार्ड के मुकाबले यूपीआई का कीमत संबंधी लाभ भी कम होगा, जिससे अमेरिकी कार्ड नेटवर्क और भुगतान मंचों को फायदा हो सकता है। शोध संस्थान ने कहा कि एक स्वतंत्र ऑडिट के जरिये यूपीआई के वास्तविक संचालन खर्च का आकलन कर उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ''सरकार को यूपीआई पर 15 अक्टूबर से लगाए जाने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के फैसले को वापस लेना चाहिए और व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई को मुफ्त रखना चाहिए।'' करीब छह साल तक पूरी तरह मुफ्त रहने वाली यूपीआई भुगतान व्यवस्था में सरकार ने 15 अक्टूबर से 2,000 रुपए से अधिक के लेनदेन पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' लगाने का प्रावधान किया है। हालांकि, व्यक्ति से व्यक्ति लेनदेन पर और छोटे भुगतान पर शुल्क नहीं लगेगा।