Edited By jyoti choudhary,Updated: 09 Oct, 2026 05:31 PM

बाजार नियामक सेबी ने निपटान समझौते की राशि की गणना के लिए नया फॉर्मूला अधिसूचित किया है। इसके तहत 10 लाख रुपए तक की राशि वाले मामलों के निपटान के लिए त्वरित प्रक्रिया भी शुरू की गई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने छह
नई दिल्लीः बाजार नियामक सेबी ने निपटान समझौते की राशि की गणना के लिए नया फॉर्मूला अधिसूचित किया है। इसके तहत 10 लाख रुपए तक की राशि वाले मामलों के निपटान के लिए त्वरित प्रक्रिया भी शुरू की गई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने छह अक्टूबर को जारी अधिसूचना में कहा है कि गलत तरीके से अर्जित लाभ, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान की राशि को समझौता राशि की गणना से अलग रखा जाएगा।
इन राशियों का आकलन हो जाने पर उनकी अलग से वसूली की जाएगी। इससे समझौते की शर्तें तय करते समय एक ही राशि की दोहरी गणना नहीं होगी। नए नियमों के तहत समझौते की शर्तों में समझौता राशि, जहां लागू हो वहां गलत तरीके से अर्जित लाभ की वापसी और सुधारात्मक एवं नियामकीय शर्तें शामिल होंगी। पहले इन शर्तों को गैर-मौद्रिक शर्तें कहा जाता था। समझौता राशि की गणना का नया फार्मूला प्रतिभूति कानूनों के तहत संबंधित उल्लंघन के लिए निर्धारित न्यूनतम जुर्माने से जुड़ी आधार राशि पर आधारित होगा।
इस राशि में कार्यवाही के चरण, नियामकीय कार्रवाई, उल्लंघन की गंभीरता, उसे बढ़ाने या कम करने वाले कारकों और कानूनी खर्चों के आधार पर बदलाव किया जाएगा। सेबी ने निपटान समझौते के लिए त्वरित प्रक्रिया के दो प्रकार तय किए हैं। इनमें उल्लंघन के प्रकार और समझौता राशि की सीमा पर आधारित प्रक्रिया शामिल हैं। दस लाख रुपये तक की समझौता राशि वाले मामले आंतरिक समिति से सीधे पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास भेजे जाएंगे।
उल्लंघन के प्रकार पर आधारित त्वरित प्रक्रिया में सेबी संबंधित इकाई को नोटिस देकर उसमें बताई गई राशि का भुगतान कर मामला निपटाने का अवसर देगा। राशि का भुगतान होने के बाद सदस्यों का पैनल समझौता आदेश जारी करेगा। इसमें कुछ खुलासों से संबंधित उल्लंघन भी शामिल हैं। नए नियमों के तहत वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी देने या धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में भी समझौते का प्रावधान है। हालांकि, ऐसे मामलों में उचित सुधारात्मक और नियामकीय उपाय करने होंगे। इनमें जरूरी खुलासे करना और दुरुपयोग की गई राशि वापस लाना शामिल है।
सेबी ने कहा कि समझौता नियम, 2026 से प्रक्रिया सरल, अधिक पारदर्शी और अनुमान के अनुरूप होगी। इससे कम गंभीर मामलों का तेजी से निपटारा करने में मदद मिलेगी, जबकि प्रतिभूति कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निवारक कार्रवाई का उद्देश्य भी बना रहेगा। सेबी के निदेशक मंडल की पिछले महीने हुई बैठक में इन नए नियमों को मंजूरी दी गई थी।