Major Crash Expected in Silver: 1980 और 2011 जैसा इतिहास दोहराएगी चांदी! कीमतों में 60% की गिरावट का अनुमान

Edited By Updated: 03 Jan, 2026 01:22 PM

silver will repeat the history of 1980 and 2011 a 60 in prices is predict

शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद होने के बावजूद चांदी की कीमतें अब भी अपने ऊंचे स्तरों के आसपास बनी हुई हैं। कॉमेक्स पर सिल्वर 71.300 डॉलर प्रति औंस पर क्लोज हुआ। मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई में कमी के चलते साल 2025 में चांदी की कीमतों में करीब...

बिजनेस डेस्कः शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद होने के बावजूद चांदी की कीमतें अब भी अपने ऊंचे स्तरों के आसपास बनी हुई हैं। कॉमेक्स पर सिल्वर 71.300 डॉलर प्रति औंस पर क्लोज हुआ। मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई में कमी के चलते साल 2025 में चांदी की कीमतों में करीब 180% की रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या अब इतिहास खुद को दोहराने वाला है?

अगर चांदी के पुराने ट्रेंड देखें तो साल 1980 और 2011 में तेज उछाल के बाद भारी गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में निवेशकों के मन में यह डर है कि कहीं मौजूदा तेजी के बाद भी वही पैटर्न दोहराया न जाए।

इंडस्ट्री तलाश रही है विकल्प

चांदी की कीमतें इतनी बढ़ चुकी हैं कि इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए इसकी लागत भारी पड़ने लगी है। सप्लाई की कमी के चलते कई उद्योग अब चांदी के विकल्प तलाशने लगे हैं। कुछ सेक्टर्स में तो तांबे की ओर शिफ्टिंग भी शुरू हो चुकी है।

मार्केट से जुड़े कुछ सूत्रों का कहना है कि फरवरी 2026 तक चांदी की कीमतें 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं लेकिन इसके बाद तेज करेक्शन देखने को मिल सकता है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 तक सिल्वर की कीमतों में 60% तक की गिरावट आ सकती है।

‘सिल्वर नहीं, तांबा बनेगा अगला किंग’

कई ग्लोबल कंपनियां अब चांदी की जगह तांबे का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। चीन, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और इजरायल की कुछ कंपनियां सॉलिड-स्टेट बैटरी में तांबे का प्रयोग कर रही हैं। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क का भी मानना है कि चांदी की तेजी कुछ समय और जारी रह सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने के बाद वित्त वर्ष 2027 के अंत तक चांदी की कीमतें 40 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकती हैं।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव से पहले ही चांदी की सप्लाई प्रभावित हुई थी। इसके बाद 1 जनवरी 2025 से चीन द्वारा चांदी के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों ने हालात और बिगाड़ दिए। अब कई विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे लंबी अवधि में चांदी में बने मुनाफे को सुरक्षित करते हुए धीरे-धीरे अपनी पोजीशन से बाहर निकलें।

इतिहास गवाह है कि 1980 में सिल्वर की कीमतें 49.50 डॉलर से गिरकर 11 डॉलर प्रति औंस पर आ गई थीं। वहीं 2011 में भी बड़ी तेजी के बाद करीब 75% की गिरावट दर्ज की गई थी। मौजूदा दौर में चांदी ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है, लेकिन आगे का रास्ता उतना आसान नहीं दिख रहा। ऐसे में निवेशकों के लिए सतर्कता और मुनाफावसूली की रणनीति बेहद जरूरी हो गई है।

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