Edited By Prachi Sharma,Updated: 19 Feb, 2026 08:37 AM

Ayodhya Ram Mandir : उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम नवमी के पावन अवसर पर भगवान रामलला के मस्तक पर होने वाला दिव्य सूर्य तिलक अब हर वर्ष एक तय वैज्ञानिक व्यवस्था के तहत संपन्न होगा। इस भव्य आयोजन का संचालन अब केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI),...
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Ayodhya Ram Mandir : उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम नवमी के पावन अवसर पर भगवान रामलला के मस्तक पर होने वाला दिव्य सूर्य तिलक अब हर वर्ष एक तय वैज्ञानिक व्यवस्था के तहत संपन्न होगा। इस भव्य आयोजन का संचालन अब केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI), रुड़की द्वारा किया जाएगा। राम मंदिर ट्रस्ट संस्था के साथ 10 वर्षों का औपचारिक अनुबंध करने की तैयारी में है, ताकि सूर्य तिलक की प्रक्रिया तकनीकी रूप से पूरी तरह सटीक और निर्बाध बनी रहे। यह जानकारी राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने दो दिवसीय बैठक के बाद साझा की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सूर्य तिलक की जो वैज्ञानिक प्रणाली विकसित की गई है, उसे उसी संस्था द्वारा संचालित किया जाएगा जिसने इसे डिजाइन और तैयार किया है। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी त्रुटि की संभावना कम होगी और परंपरा निरंतर जारी रहेगी।
19 मार्च के बाद अन्य मंदिरों में भी दर्शन
राम मंदिर परिसर में स्थित 15 अन्य मंदिरों के दर्शन भी आम श्रद्धालुओं के लिए 19 मार्च को आयोजित राष्ट्रपति कार्यक्रम के बाद खोल दिए जाएंगे। एक समय में अधिकतम 1000 श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाएगा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पास प्रणाली लागू की जाएगी और केवल अधिकृत पासधारकों को ही परिसर में प्रवेश मिलेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का विशेष कार्यक्रम
नव संवत्सर के अवसर पर आयोजित विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लगभग चार घंटे तक मंदिर परिसर में उपस्थित रहेंगी। इस दौरान वे मंदिर के दूसरे तल पर स्थित गर्भगृह में ‘राम रक्षा यंत्र’ की स्थापना करेंगी। साथ ही मंदिर निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले लगभग 400 श्रमिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को सम्मानित करने की भी योजना है।
सितंबर तक तैयार होगा अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय
राम मंदिर परिसर में बन रहे अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय का निर्माण कार्य सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। संग्रहालय में कुल 20 गैलरियां बनाई जा रही हैं। इनमें एक विशेष गैलरी भगवान हनुमान को समर्पित होगी, जिसका निर्माण आईआईटी मद्रास की टीम कर रही है। इस गैलरी में 3D तकनीक के माध्यम से लगभग 12 मिनट की विशेष प्रस्तुति दिखाई जाएगी। हनुमान गैलरी में सीमित संख्या में टिकट के आधार पर प्रवेश मिलेगा, जबकि अन्य गैलरियों में श्रद्धालु और पर्यटक निशुल्क भ्रमण कर सकेंगे।
सूर्य तिलक को मिला स्थायी स्वरूप
राम नवमी पर सूर्य की किरणों से भगवान रामलला के मस्तक पर तिलक करने की वैज्ञानिक व्यवस्था को अब स्थायी रूप दिया जा रहा है। अगले 10 वर्षों तक इस तकनीक का संचालन CBRI द्वारा ही किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि आने वाले समय में यह परंपरा बिना किसी बाधा के जारी रहे।