Edited By Sarita Thapa,Updated: 26 Feb, 2026 09:56 AM

अयोध्या का राम मंदिर न केवल भक्ति का केंद्र बन रहा है, बल्कि यह जल्द ही भारतीय संस्कृति और साहित्य के विश्व के सबसे बड़े संग्रहालय के रूप में भी उभरेगा।
Ayodhya Ram Mandir News : अयोध्या का राम मंदिर न केवल भक्ति का केंद्र बन रहा है, बल्कि यह जल्द ही भारतीय संस्कृति और साहित्य के विश्व के सबसे बड़े संग्रहालय के रूप में भी उभरेगा। केरल के अध्यात्म रामायण के ज्ञान से लेकर बंगाल की कृत्तिवास रामायण की कला तक, अब देश-विदेश की विविध रामायणों का संगम प्रभु श्री राम की नगरी में होने जा रहा है।
रामायणों का महासंग्रह क्या है खास ?
राम मंदिर के दूसरे तल पर एक भव्य रामायण ग्रंथागार बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में प्रचलित रामायण के विभिन्न स्वरूपों को एक छत के नीचे लाना है। केरल की प्रसिद्ध अध्यात्म रामायण और बंगाल की कृत्तिवास रामायण को इस संग्रह में विशेष स्थान दिया जा रहा है। इसके अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा और असम से भी प्राचीन पांडुलिपियों के प्रस्ताव आए हैं। हाल ही में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने 233 साल पुरानी वाल्मीकि रामायण की दुर्लभ पांडुलिपि मंदिर ट्रस्ट को सौंपी है। इन प्राचीन ग्रंथों को सुरक्षित रखने के लिए मंदिर में डिजिटल आर्काइविंग और कंट्रोल टेम्परेचर वाली विशेष लैब बनाई जा रही है।
दान और दर्शन के नियम
यदि कोई भक्त या विद्वान अपनी पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित रामायण की प्रति मंदिर को भेंट करना चाहता है, तो उसके लिए कुछ नियम तय किए गए हैं।
प्रामाणिकता की जांच: ट्रस्ट केवल उन्हीं ग्रंथों को स्वीकार करेगा जो ऐतिहासिक रूप से प्रामाणिक हों। दुर्लभ पांडुलिपियों की जांच विशेषज्ञों की एक टीम करेगी।
डिजिटलीकरण: दान में मिली हर रामायण को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा ताकि दुनिया भर के शोधार्थी (Scholars) इसे पढ़ सकें।
नाम का अंकन: विशेष और प्राचीन प्रतियों के दानदाताओं का नाम मंदिर के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।
सुरक्षा प्रोटोकॉल: मंदिर के उच्च सुरक्षा क्षेत्र में होने के कारण, इन ग्रंथों को देखने के लिए शोधार्थियों को पहले से अनुमति लेनी होगी।
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