राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला : कर्मचारियों की नियुक्ति करवाने वालों पर भी कसेगा शिकंजा

Edited By Updated: 28 Jun, 2026 12:54 PM

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेष जांच दल (एस.आई.टी.) की जांच अब केवल गिरफ्तार किए गए आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दानराशि की गणना से जुड़े बैंककर्मियों, कलैक्शन एजैंसी और गणना के कर्मचारियों की...

अयोध्या (इंट.) : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेष जांच दल (एस.आई.टी.) की जांच अब केवल गिरफ्तार किए गए आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दानराशि की गणना से जुड़े बैंककर्मियों, कलैक्शन एजैंसी और गणना के कर्मचारियों की नियुक्ति करवाने वाले लोगों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, विवेचना आगे बढ़ने पर कुछ नए नाम भी सामने आने की संभावना है। 

सूत्रों का कहना है कि एस.आई.टी. की जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने करीब 40 दिनों के दौरान लगभग 70 बार चढ़ावे की धनराशि में हेराफेरी की। आरोपियों से एक हजार अमरीकी डालर और विदेशी मुद्राएं भी बरामद हुई हैं। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि गणना प्रक्रिया की निगरानी कर रहे बैंककर्मियों ने इन घटनाओं पर ध्यान क्यों नहीं दिया। यदि किसी स्तर पर जान-बूझकर लापरवाही या अनदेखी हुई है तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

मामले की विवेचना पुलिस क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष त्रिपाठी को सौंपी गई है। जांच एजैंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि गणना कर्मियों की नियुक्ति किसकी संस्तुति पर हुई, उन्हें बिना पर्याप्त सत्यापन के इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में कैसे लगाया गया और क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति या जनप्रतिनिधि की सिफारिश इसमें शामिल थी। दानराशि की गणना का दायित्व भारतीय स्टेट बैंक को सौंपा गया था। बैंक की ओर से इस कार्य के लिए कर्मचारियों की तैनाती की गई थी, जबकि नकदी संग्रहण का काम एक अधिकृत कलैक्शन एजैंसी के माध्यम से किया जाता था। 

 सितम्बर 2024 और फरवरी 2025 में ट्रस्ट और बैंक के बीच दानराशि की गणना के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एस.ओ.पी.) तय की गई थी, लेकिन बाद में उसका पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में इसे गंभीर और जान-बूझकर की गई लापरवाही बताया गया है। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना किसी अधिकृत आदेश के दानपात्र (हुंडी) की चाबियां थीं। यह भी जांच का विषय है कि उसे यह अधिकार किसके निर्देश पर मिला?

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