Badrinath Dham: बद्रीनाथ में 1815 से है सेंगोल

Edited By Updated: 28 May, 2023 09:14 AM

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देहरादून (मनीष ओली): उत्तराखंड स्थित चारधामों में से एक बद्रीनाथ में राजदंड (सेंगोल) की व्यवस्था 1815 से चली आ रही है। बद्रीनाथ के रावल के आगे आज भी सेंगोल स्वर्ण

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देहरादून (मनीष ओली): उत्तराखंड स्थित चारधामों में से एक बद्रीनाथ में राजदंड (सेंगोल) की व्यवस्था 1815 से चली आ रही है। बद्रीनाथ के रावल के आगे आज भी सेंगोल स्वर्ण छड़ी के रूप में चलता है। इसे टिहरी राजघराने ने तत्कालीन रावल को उनकी शक्ति और सत्ता के प्रतीक के रूप में सौंपा था। 

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बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल बताते हैं कि सन 1815 में अंग्रेजों व टिहरी नरेश के बीच गढ़वाल राज्य का विभाजन हुआ था। बंटवारे में बदरीनाथ का हिस्सा अंग्रेजों के क्षेत्र में आया परंतु धार्मिक मान्यता को देखते हुए बद्रीनाथ धाम के क्षेत्र का अधिकार टिहरी राजघराने के पास ही रखा गया। टिहरी राजा ने बदरीनाथ की शासन व्यवस्था की जिम्मेदारी उसके पुजारी रावल को दे दी। इसके लिए उन्हें राजदंड सौंपा गया। स्वतंत्रता के पश्चात रावल के प्रशासनिक व न्यायिक कार्य धीरे-धीरे कम हो गए और अब वे पूर्ण रूप से धार्मिक कार्य करते हैं।

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