छठ पूजा के 4 दिन महिलाओं के लिए होते हैं बेहद खास, जानिए किसके लिए रखती हैं व्रत

Edited By Updated: 26 Oct, 2022 12:39 PM

chhath puja 2022

प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है, जिसे किंवदंतियों के अनुसार सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। छठी मैया को समर्पित ये पर्व दीपावली के ठीक 6 दिन बाद आता है। बता दें मुख्य रूप से ये पर्व उत्तर भारत...

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है, जिसे किंवदंतियों के अनुसार सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। छठी मैया को समर्पित ये पर्व दीपावली के ठीक 6 दिन बाद आता है। बता दें मुख्य रूप से ये पर्व उत्तर भारत के राज्य बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। धर्म शास्त्रों  में इस त्यौहार से जुड़ी जो जानकारी मिलती है उसके अनुसार छठ पर्व का ये व्रत सूर्य देव व छठी मैया को समर्पित है। महिलाएं ये व्रत संतान की दीर्घाय, सौभाग्य और खुशहाल जीवन की कामना से रखती हैं। हिंदू धर्म में पड़ने वाले अन्य व्रतों की तुलना में ये व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इस दौरान महिलाएं लगभग 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती हैं। तो आइए इसी के उपलक्ष्य में जानते हैं इस साल छठ पूजा का आरंभ किस दिन हो रहा है। साथ ही जानेंगे क्या है छठी मैया व सूर्य देव की पूजा का क्या है समय- 
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छठ पूजा पहला दिन 
नहाय- खाए- 28 अक्टूबर 2022

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक दीवाली के ठीक 4 दिन बाद अर्थात कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को छठ पूजा का पहला दिन नहाए खाए परंपरा के साथ निभाया जाएगा। प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विशेष प्रकार के रीति रिवाजों का पालन किया जाता है। ज्योतिषी बताते हैं कि इस दिन घर की साफ-सफाई करना अति आवश्यक होता है। इसके उपरांत व्रती महिला तो स्वंय सन्ना करके शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करनी चाहिए। बता दें व्रती के भोजन ग्रहण करने के बाद ही घर के बाकी सदस्यों को भोजन ग्रहण करना चाहिए। 
 

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छठ पूजा दूसरा दिन 
खरना- 29 अक्टूबर 2022

छठ पूजा का दूसरा दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को माना जाात है, जिस दिन भक्त दिनभर का उपवास रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन को खरना के नाम से जाना जाता है। इस दिन सुबह व्रती स्नान ध्यान करके पूरे दिन का व्रत करने का संकल्प लेते हैं। इसके उपरांत अगले दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए प्रसाद तैयार किया जाता है। तो वहीं शाम को पूजा के लिए गुड़ की खीर बनाई जाती है। मान्यता है कि इस प्रसाद को मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी से आग जलाकर ही बनाया जाता है। 
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छठ पूजा तीसरा दिन      
डूबते सूर्य को अर्घ्य- 30 अक्टूबर 2022

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा की मुख्य तिथि माना जाता है। इस दिन व्रती शाम के समय पूरी श्रद्धाभाव के साथ पूजा की तैयारी करते हैं तथा बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है। जिसके बाज व्रती अपने पूरे परिवार के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य देने घाट पर जातें हैं। 
सूर्यास्‍त का समय: शाम 5 बजकर 37 मिनट.

छठ पूजा चौथा दिन 
उगते सूर्य को अर्घ्य- 31 अक्टूबर 2022

इस पर्व का चौथा यानि आखिरी दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर आरंभ होता है। माना जाता है इस दिन सूर्योदय से पहले ही भक्त सूर्य देव की दर्शनों के लिए पानी में खड़े हो जाते हैं और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर अपने व्रत को संपूर्ण करते हैं तथा प्रसाद का सेवन करके व्रत का पारण करते हैं। बता दें हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय : सुबह 6 बजकर 31 मिनट पर होगा
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