Edited By Sarita Thapa,Updated: 05 Nov, 2026 04:15 PM

जब हम ‘मुझे कुछ नहीं चाहिए’ के भाव में जीने लगते हैं, तब सब कुछ स्वतः ही हमारे पास आने लगता है। समृद्धि सबसे पहले मन की अवस्था है। यदि हम जीवन में केवल अभावों पर दृष्टि रखेंगे, तो अभाव ही बढ़ते जाएंगे।
Diwali Relationship Healing Tips : जब हम ‘मुझे कुछ नहीं चाहिए’ के भाव में जीने लगते हैं, तब सब कुछ स्वतः ही हमारे पास आने लगता है। समृद्धि सबसे पहले मन की अवस्था है। यदि हम जीवन में केवल अभावों पर दृष्टि रखेंगे, तो अभाव ही बढ़ते जाएंगे। इसके विपरीत, जब हम अपने पास जो कुछ है, उसे देखना और उसके प्रति कृतज्ञ होना सीखते हैं, तब जीवन में समृद्धि का विस्तार होने लगता है।
दीपावली पर दीप जलाने की परंपरा केवल घरों को सजाने के लिए नहीं है, यह तो जीवन में ज्ञान के प्रकाश और समृद्धि का उत्सव है।
दीपों की पंक्तियां हमें स्मरण कराती हैं कि जीवन के प्रत्येक पक्ष को हमारे ध्यान और ज्ञान के प्रकाश की आवश्यकता है। यद्यपि हम सभी के भीतर गहराई में शुद्ध चेतना का प्रकाश विद्यमान है, लेकिन उसे अपने आचरण और व्यवहार में भी प्रकट करना आवश्यक है। हमें अपने व्यक्तित्व के उन पहलुओं को भी प्रकाशित करना है, जो अभी अज्ञान के अंधकार में छिपे हुए हैं। यह तभी संभव है, जब हम प्रत्येक हृदय में ज्ञान और प्रेम का दीप जलाएं तथा प्रत्येक चेहरे पर मुस्कान लाएं। हमें केवल एक दीप जलाकर संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए, बल्कि हजारों दीप जलाने चाहिए। अज्ञान के अंधकार को दूर करने के लिए ज्ञान का प्रकाश फैलाना आवश्यक है।
प्रकाश कभी अंधकार से संघर्ष नहीं करता, क्योंकि अंधकार का अपना कोई अस्तित्व नहीं होता। वह तो केवल प्रकाश का अभाव है। मान लीजिए, कोई कमरा बीस वर्षों से अंधकार में डूबा है, तो उसे प्रकाशित करने के लिए बीस वर्षों तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। वहां केवल एक दीप जलाने की आवश्यकता होती है। दीप जलते ही अंधकार अपने आप दूर हो जाता है। इसी प्रकार, भले ही आपका अतीत कितना ही दुखद क्यों न रहा हो, जागिए और देखिए कि जीवन हर पल नया है। ज्ञान का प्रकाश होते ही अतीत का अंधकार स्वतः मिट जाता है।
प्रत्येक मनुष्य में कुछ न कुछ अच्छे गुण अवश्य होते हैं। हमारे द्वारा जलाया जाने वाला प्रत्येक दीप इन्हीं सद्गुणों का प्रतीक है। किसी में धैर्य है, किसी में प्रेम, किसी में साहस, तो किसी में उदारता। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनमें लोगों को एकजुट करने की विशेष क्षमता होती है। हमारे भीतर छिपे ये सद्गुण एक प्रज्वलित दीप के समान हैं। आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने और प्रकट करने की है। दीपावली ऐसा पर्व है, जो हमारी बुद्धि और हृदय दोनों को स्पर्श करता है तथा हमें अपने आसपास के लोगों की सेवा करने की प्रेरणा देता है। भावनात्मक स्तर पर यह पर्व हमें बीती बातों से उपजी गलतफहमियों और मन में संचित नकारात्मक भावनाओं को छोड़ने का अवसर देता है। हमें अतीत के पश्चाताप और भविष्य की चिंताओं को त्यागकर वर्तमान में जीना सीखना चाहिए। दीपावली वह समय है, जब हम अपने जीवन में प्राप्त ज्ञान और अनुभवों को स्वीकार करते हुए एक नई शुरुआत का स्वागत करते हैं।
उत्सव मनाना आत्मा का स्वभाव है और जीवन में उत्सव मनाने का हर अवसर शुभ है। प्राचीन ऋषियों ने प्रत्येक उत्सव को आध्यात्मिक पवित्रता से जोड़ा, ताकि हम केवल बाहरी गतिविधियों में ही न उलझकर रह जाएं। धार्मिक अनुष्ठानों और परंपराओं का पालन करना वास्तव में परमात्मा के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने का एक माध्यम है। इससे उत्सव में गहराई और सार्थकता आती है। जो व्यक्ति ज्ञान में नहीं जीता, उसके लिए दीपावली वर्ष में केवल एक बार आती है, लेकिन जो ज्ञान में स्थित है, उसके लिए हर पल और हर दिन दीपावली है। हमें ज्ञान के साथ दीपावली मनानी चाहिए और मानवता की सेवा का संकल्प लेना चाहिए। अपने हृदय में प्रेम का दीप जलाएं, अपने घर में समृद्धि का दीप प्रज्वलित करें, दूसरों की सेवा के लिए करुणा का दीप जलाएं, अज्ञान के अंधकार को दूर करने के लिए ज्ञान का दीप जलाएं और परमात्मा द्वारा प्रदान की गई समृद्धि के प्रति कृतज्ञता का दीप प्रज्वलित करें।
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