दीपावली की सबसे अंधेरी रात क्यों मानी जाती है शक्तिशाली? जानें शरीर के सात चक्रों और आत्मिक उत्थान का रहस्य

Edited By Updated: 30 Oct, 2026 04:29 PM

diwali night spiritual significance

दीपावली, वर्ष की सबसे अंधेरी रात होती है किन्तु सबसे अधिक शक्तिशाली भी, जिसके भीतर अज्ञान के अन्धकार को दूर कर ज्ञान के प्रकाश की शक्ति भी विद्यमान है अर्थात घना अन्धकार ही अपने अपने भीतर प्रकाश की पिपासा को बढ़ाता है।

Diwali Night Spiritual Significance : दीपावली, वर्ष की सबसे अंधेरी रात होती है किन्तु सबसे अधिक शक्तिशाली भी, जिसके भीतर अज्ञान के अन्धकार को दूर कर ज्ञान के प्रकाश की शक्ति भी विद्यमान है अर्थात घना अन्धकार ही अपने अपने भीतर प्रकाश की पिपासा को बढ़ाता है। मानव शरीर में, मूलाधार से आज्ञा चक्र( ललाट का केंद्र ) तक की यात्रा ही अन्धकार से प्रकाश की ओर जाने की यात्रा है, आत्मा के विकास की यात्रा है। मूलाधार, भगवान गणेश का स्थान है जो भूलोक के देव है तथा आज्ञा, महादेव शिव का । सृष्टि में कोई भी परिवर्तन या रूपान्तरण शिव शक्ति द्वारा ही संभव है। इस सृष्टि की माया से परे का सत्य ज्ञान अर्थात स्थूल से सूक्ष्म का ज्ञान उन्ही की कृपा से संभव है। दीपावली की रात लोग गणेशजी तथा लक्ष्मीजी की दीया जलाकर पूजा करते हैं किन्तु क्या कभी किसी ने इस बात पर ध्यान दिया है कि देवी लक्ष्मी उल्लू पर सवार हैं तथा भगवान गणेश मूषक पर। उल्लू और मूषक दोनों ही अंधेरे में रहने वाले प्राणी हैं। उल्लू प्रकाश में इस कारण नहीं देख सकता क्योंकि लक्ष्मीजी उस पर सवार हैं और चूहा प्रकाश देखकर भाग जाता है क्योंकि वह गणेश जी का वाहन है।

Diwali Night Spiritual Significance

कोई भी जीव जो मूलस्थान के स्तर पर है उल्लू के समान है जो माया रुपी अंधकार व् अज्ञान में जी रहा है या फिर उस मूषक के सामान है जो भौतिक सुखों के पीछे भाग रहा है। यह भी तो प्रकाश से अंधकार की ओर ही जाना हुआ क्योंकि इस संसार के सुख भोग भी तो अस्थायी ही है। इस सत्य को जानते हुए भी कि एक दिन यह सब छूट जायेगा, हम इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं और दिन रात उसी नश्वरता के पीछे भागते हुए अपना जन्म और कर्म दोनों ही गवां देते हैं और यही अज्ञानता का अंधकार है। जैसा कि चक्र संतुलन प्राणायाम में विस्तृत रूप से बताया गया है, हमारी नाक की नोक मूलाधार चक्र का प्रतीक है और यहीं से आत्मिक उत्थान की यात्रा आरम्भ होती है। एक साधक का पहला अनुभव भौतिक संतुष्टि ही है। भौतिक सुख सुविधाओं का भोग गलत नहीं है क्योंकि शरीर तो भौतिक अनुभवों के लिए ही है, गलती तो उन भोगों से लगाव रखने में है। यही आसक्ति तो एक व्यक्ति को सुख दुःख के बंधन चक्र में बांधकर रोग और वृद्धावस्था की ओर ले जाती है। यह तो सुनिश्चित है कि हर भोग अस्थायी है जो अपने साथ अत्यधिक खुशी लाता है किन्तु जब छूटता है तो बहुत कष्ट भी देता है। किसी भी भोग विलास का परिणाम रोग ही है। अब यह आपके ऊपर है कि आप उनके प्रति आसक्त रहें या अनासक्त। क्योंकि आसक्ति ही अंधकार है और अनासक्ति प्रकाश की ओर ले जाती है।

Diwali Night Spiritual Significance

चक्र संतुलन क्रिया के प्रारम्भिक चरणों में एक साधक अपनी नाक के सिरे ( काकी मुद्रा ) पर ध्यान करता है क्योंकि उस समय वह भौतिक अनुभवों की इच्छा रखता है। कुण्डलिनी शक्ति, जो अर्ध निष्क्रिय रूप में मूलस्थान पर कुंडलित रूप में निहित है,ऐसे व्यक्ति के लिए यह शक्ति दिन प्रतिदिन की भोग क्रियाओं में व्यय जाती है। जैसे-जैसे व्यक्ति साधना में अग्रसर होता है, गुरु उसे उच्च लोकों के अनुभव देते हुए उसकी मूल इच्छाओं को परिवर्तित कर देते हैं। जब कुण्डलिनी शक्ति ऊपर की ओर उठती है तो शरीर में कई प्रकार की अनुभूतियां होती हैं जैसे अत्यधिक गर्मी महसूस होना, संवेग, स्पंदन, कम्पन आदि का अनुभव होना जो कभी कभी नियंत्रण में भी नहीं होते, या फिर कभी- कभी गुरु पर ही संदेह पैदा कर देते हैं या फिर कोई तीव्र भौतिक इच्छा जागृत हो जाती है जो प्रकाश से अंधकार की और धकेलती है। ऐसा करने की इच्छा बहुत तीव्र भी हो सकती है। ऐसे समय पर ही साधक को अपने पिछले अनुभवों के आधार पर ध्यान रखते हुए योग का मार्ग व् गुरु का हाथ पकड़ कर रखना है, निश्चित ही उसे प्रकाश के दर्शन होंगे। क्योंकि यहां पर साधक यदि भटक गया या फिर संदेह कर गुरु का हाथ छोड़ दिया तो वह हमेशा के लिए अन्धकार में खो जाता है। चक्र संतुलन प्राणायाम के अंतिम चरणों में,अपने आज्ञा स्थान पर ( शाम्भवी मुद्रा ) ध्यान किया जाता है जो उस शक्ति का अनुभव देता है जिससे सभी कुछ नियंत्रित व् संचालित है।

अपने आज्ञा स्थान पर आंखों को स्थिर करना अत्यधिक कठिन है क्योंकि आंखें तभी स्थिर हो सकती हैं जब विचार स्थगित हो गए हों। आंखों का स्थिर होना इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि विचार प्रक्रिया हमारी शक्ति को क्षीण करती है। जो शक्ति हमारे भीतर प्रकाश जागृत करने में सक्षम है , वह गहन विचार प्रक्रिया से क्षीण होती है। यह विचार ही आपकी इच्छाएं हैं जो ध्यान के समय विचारों के रूप में उठती हैं, कभी आप अपनी समस्याओं का विचार करते हैं, तो कभी आवश्यकताओं का तो कभी उस अंधेरे का जिससे आप बाहर निकलना चाहते हैं। जब भी आप सोचते हैं तब मस्तिष्क न्यूरॉन्स में एक कम्पन होता है जो नसों के माध्यम से उत्तेजना या संवेदना पैदा करता है, जिस कारण आपका ध्यान भंग हो जाता है और आप सूक्ष्म शक्ति के अनुभव से वंचित रह जाते हैं ।

Diwali Night Spiritual Significance

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 

 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!