Gas Cylinder Shortage in Temple : आस्था की रसोई पर महंगाई का साया, LPG की किल्लत ने बदला प्रसिद्ध तीर्थस्थलों का मेन्यू

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 05:04 PM

gas cylinder shortage in temple

भारत के विशाल मंदिरों में होने वाला अन्नदान केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। लेकिन आज देश के कई प्रतिष्ठित मंदिर एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहे हैं।

Gas Cylinder Shortage in Temple : भारत के विशाल मंदिरों में होने वाला अन्नदान केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। लेकिन आज देश के कई प्रतिष्ठित मंदिर एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहे हैं। रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत और कमर्शियल सिलेंडरों की आसमान छूती कीमतों ने मंदिरों की व्यवस्थाओं को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है। आलम यह है कि अयोध्या के राम मंदिर से लेकर शिरडी के साईं धाम तक, जहां चौबीसों घंटे विशाल लंगर चलते थे, वहां अब गैस की बचत के लिए बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। कहीं तीन वक्त के भोजन को दो वक्त किया जा रहा है, तो कहीं व्यंजनों की संख्या कम कर दी गई है। यह स्थिति न केवल मंदिर प्रशासनों के लिए एक चुनौती है, बल्कि उन हजारों भक्तों के लिए भी चिंता का विषय है जो दूर-दराज से 'प्रसाद' की आस लेकर पहुंचते हैं। तो आइए जानते हैं कि भारत के किन बड़े मंदिरों में इस संकट ने सबसे ज्यादा असर डाला है और कैसे पारंपरिक चूल्हे एक बार फिर आधुनिक रसोई की जगह ले रहे हैं।

किन मंदिरों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर ?
यद्यपि संकट देशव्यापी है, लेकिन दक्षिण और उत्तर भारत के कुछ विशिष्ट मंदिरों जैसे- अयोध्या राम मंदिर, नोएडा इस्कॉन मंदिर, शिरडी साईं बाबा मंदिर, दीघा जगन्नाथ मंदिर में इसका प्रभाव अधिक देखा गया है। कई मंदिरों, जहां प्रतिदिन हज़ारों श्रद्धालु निःशुल्क भोजन करते हैं, वहां अब व्यंजनों की संख्या कम कर दी गई है। भारी मात्रा में बनने वाले लड्डू और अन्य भोग जिन्हें पकाने के लिए बड़े Commercial सिलेंडरों की आवश्यकता होती है, उनकी लागत में भारी वृद्धि हुई है। कुछ छोटे और मध्यम स्तर के मंदिरों ने लंगर के समय को सीमित कर दिया है ताकि गैस की खपत को नियंत्रित किया जा सके।

संकट के पीछे के मुख्य कारण
घरेलू सिलेंडरों की तुलना में कमर्शियल गैस के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे मंदिर ट्रस्टों का बजट बिगड़ गया है। कुछ राज्यों में लॉजिस्टिक दिक्कतों के कारण समय पर रिफिल नहीं मिल पा रहे हैं। नववर्ष और चैत्र नवरात्र जैसे त्योहारों के करीब होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है, जिससे ईंधन की मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है।

श्रद्धालुओं की आस्था बरकरार
इन चुनौतियों के बावजूद भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। मंदिरों में दर्शन के लिए पहले की तरह ही भीड़ उमड़ रही है। कई श्रद्धालु स्वयं भी अनाज, घी या अन्य सामग्री दान कर मंदिर की सेवा में सहयोग दे रहे हैं, ताकि भोग और प्रसाद की परंपरा जारी रह सके।

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