Edited By Prachi Sharma,Updated: 29 Mar, 2026 08:32 AM

Hanuman Jyanti 2026 :अयोध्या में इस साल की हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक बड़े वैचारिक और संगठनात्मक मिलन का गवाह बनने जा रही है। 2 अप्रैल को राम मंदिर परिसर के भीतर स्थित हनुमान मंदिर में एक भव्य आयोजन होने वाला है, जिसमें मंदिर...
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Hanuman Jyanti 2026 :अयोध्या में इस साल की हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक बड़े वैचारिक और संगठनात्मक मिलन का गवाह बनने जा रही है। 2 अप्रैल को राम मंदिर परिसर के भीतर स्थित हनुमान मंदिर में एक भव्य आयोजन होने वाला है, जिसमें मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया जाएगा। इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण और इसके पीछे के संदेशों को हम इस तरह समझ सकते हैं:
प्रमुख हस्तियों की वापसी और एकजुटता
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता विनय कटियार की सक्रियता है। बजरंग दल के संस्थापक होने के नाते राम मंदिर आंदोलन में उनका कद बहुत बड़ा रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से मंदिर ट्रस्ट के कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति कम ही देखी गई थी। अब उनकी अगुवाई में होने वाला यह कार्यक्रम पुराने मतभेदों को मिटाकर सबको साथ लाने की एक नई शुरुआत माना जा रहा है।
विशिष्ट अतिथियों का जमावड़ा
इस अवसर पर केवल स्थानीय श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि आंदोलन से जुड़े पुराने चेहरों को भी सम्मान दिया जा रहा है:
अनुभवी नेतृत्व: मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता जयभान सिंह पवैया, प्रकाश शर्मा और सुरेंद्र जैन जैसे पूर्व संयोजकों को विशेष तौर पर बुलाया गया है।
साधु-संतों का सानिध्य: आयोजन में लगभग 50 प्रतिष्ठित संत और 200 से अधिक विशेष मेहमान शिरकत करेंगे।
आयोजन का गहरा महत्व
राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और पूर्व नेताओं को इस तरह प्रमुखता देना कई मायनों में खास है:
सम्मान और पहचान: यह उन कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करने का तरीका है जिन्होंने आंदोलन के शुरुआती दिनों में लाठियां खाईं और संघर्ष किया।
अतीत की कड़वाहट का अंत: चंपत राय और विनय कटियार के बीच अतीत में दिखी वैचारिक दूरियों को खत्म कर एक संगठनात्मक एकजुटता का संदेश दिया जा रहा है।
ऐतिहासिक संदर्भ: विश्व हिंदू परिषद के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने याद दिलाया कि कैसे इन नेताओं ने अमरनाथ यात्रा जैसी कठिन चुनौतियों के समय संगठन को मजबूती प्रदान की थी।
अयोध्या में होने वाला यह ध्वजारोहण महज एक रस्म नहीं है, बल्कि यह राम मंदिर आंदोलन के पुराने योद्धाओं के सम्मान और भविष्य की एकता का एक नया अध्याय है।