Holi Bhai Dooj: भाई की लम्बी उम्र के लिए इस शुभ मुहूर्त में करें तिलक, पढ़ें कथा

Edited By Updated: 09 Mar, 2023 07:11 AM

holi bhai dooj

हिंदू धर्म में दिवाली के बाद भाई दूज की बहुत मान्यता है लेकिन इसी तरह होली के बाद भाई दूज भी बहुत मायने रखता है। इस दिन बहनें

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Holi Bhai Dooj 2023: हिंदू धर्म में दिवाली के बाद भाई दूज की बहुत मान्यता है लेकिन इसी तरह होली के बाद भाई दूज भी बहुत मायने रखता है। इस दिन बहनें भाई को टीका लगाकर उनकी लम्बी उम्र और तरक्की की कामना करती हैं। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाते हैं। ये पर्व होलिका दहन के दो दिन बाद मनाया जाता है। तो आइए जानते हैं कि क्यों मनाया जाता है होली के बाद भाई दूज और कौन से शुभ मुहूर्त में करें भाई को तिलक-

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Holi Bhai Dooj shubh Muhurat होली भाई दूज 2023 मुहूर्त
द्वितीया तिथि आरंभ- 8 मार्च को रात 7 बजकर 42 मिनट से शुरू
द्वितीया तिथि समाप्त- 9 मार्च को रात 8 बजकर 54 मिनट तक
होली भाई दूज तिथि- 9 मार्च 2023, गुरुवार
अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 42 मिनट तक

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Holi Bhai Dooj katha होली भाई दूज कथा: कथाओं के अनुसार एक गांव में एक बुढ़िया रहती थी। उस बुढ़िया का एक पुत्र और एक पुत्री थी। बहन की शादी के बाद भाई ने अपनी मां से बहन के घर जाकर तिलक करवाने का आग्रह किया। बुढ़िया ने अपने बेटे को जाने की इजाजत दे दी। रास्ते में जाते समय उसे एक नदी मिली, तब नदी कहने लगी मैं तुम्हारी काल हूं, मैं तुम्हारी जान ले लूंगी। तब उस लड़के ने कहा, पहले मैं अपनी बहन से तिलक करवा लूं, फिर मेरे प्राण हर लेना।

थोड़ा सा आगे बढ़ने के बाद उसका सामना एक शेर और सांप से हुआ। उन दोनों से भी उस लड़के ने यही कहा। जब लड़का बहन के घर पहुंचा तो उसकी बहन सूत कात रही थी। तिलक कराते समय भाई का दुखी चेहरा देखा तो बहन ने इसका कारण पूछा तब भाई ने रास्ते की सारी बात अपनी बहन को बताई।

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बहन ने अपने भाई को रुकने के लिए बोला और तालाब के पास गई। वहां एक बुढ़िया बैठी हुई थी। उस बुढ़िया से बहन ने  भाई की समस्या का समाधान मांगा। तब बुढ़िया कहने लगी। ये सब तेरे कर्मों की वजह से हो रहा है। अगर तू अपने भाई को बचाना चाहती है तो उसकी शादी तक उसके साथ रहना होगा। बहन-भाई को जाकर कहती है कि मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी। बहन अपने साथ मांस, दूध और ओढ़नी लेकर जाती है। दोनों आगे चले तो रास्ते में उन्हें शेर मिला। बहन शेर के सामने मांस रख देती है। उसके बाद वे आगे बढ़े फिर रास्ते में सांप मिला तो बहन ने सांप के आगे दूध रख दिया। उसके बाद उसे रास्ते के अंत में नदी मिली। बहन ने पूरी श्रद्धा से नदी को चुनरी ओढ़ा कर नमन किया और घर चली गई। इसलिए कहा जाता है कि बहन से तिलक करवाने के बाद भाई के जीवन से सारे कष्ट चले जाते हैं।

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