Edited By Sarita Thapa,Updated: 19 Jan, 2026 12:48 PM

विख्यात लेखक जॉन मरे ने अपने लेखन और जीवन से समाज को नई दिशा दी थी। एक बार वह लेखन कार्य में व्यस्त थे, तभी दो महिलाएं किसी जन-कल्याणकारी काम के लिए उनसे चंदा मांगने आईं।
Inspirational Context : विख्यात लेखक जॉन मरे ने अपने लेखन और जीवन से समाज को नई दिशा दी थी। एक बार वह लेखन कार्य में व्यस्त थे, तभी दो महिलाएं किसी जन-कल्याणकारी काम के लिए उनसे चंदा मांगने आईं। अपने कार्य को बीच में छोड़ने के बाद जान मरे ने वहां जल रही दो मोमबत्तियों में से एक को बुझा दिया। अब वह महिलाओं से उनके आने के उद्देश्य और सेवा कार्य के बारे में बातचीत कर रहे थे।
महिलाएं अपनी योजना के बारे में बता तो रही थीं, पर जॉन मरे के एक मोमबत्ती बुझा देने पर उन्हें लगा कि यहां किसी तरह का चंदा मिलने की उम्मीद नहीं है। एक महिला ने दूसरी महिला के कान में धीरे से कह भी दिया कि यहां कुछ मिलने वाला नहीं है। पर जॉन मरे को उन महिलाओं के सेवा और परोपकार के काम उद्देश्यपूर्ण लगे।

उन्होंने खुशी-खुशी महिलाओं को 100 डॉलर दे दिए। कहां तो उन्हें लग रहा था एक फूटी कौड़ी नहीं मिलेगी और कहां इतनी बड़ी राशि मिल गई। दोनों महिलाओं के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। उनमें से एक ने कहा हमें तो आपसे एक सेंट भी पाने की उम्मीद नहीं थी, क्योंकि आपने हमारे आते ही एक मोमबत्ती बुझा दी थी। आपका यह व्यवहार हमें अजीब लगा, आखिर आपके मोमबत्ती बुझाने का क्या कारण है।
जॉन मरे ने उत्तर दिया, अपनी इसी बचत की आदत के कारण मैं आपको 100 डॉलर देने में समर्थ हुआ। मेरे विचार से आपसे बातचीत करने के लिए एक मोमबत्ती का प्रकाश काफी है। हम अपनी इन्हीं छोटी-छोटी बचतों से बड़ी राशि का संग्रह कर सकते हैं और सेवा के कार्य में लगा सकते हैं। समाज सेवा में जुटी वे महिलाएं बचत के महत्व को समझ चुकी थीं।

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