Edited By Niyati Bhandari,Updated: 03 Oct, 2023 10:45 AM

एक बालक को नई-नई खेलों में आनंद आता था। एक दिन उसके पिता ने उसे एक छोटी-सी कुल्हाड़ी लाकर दी। अब वह हमेशा कुल्हाड़ी
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Inspirational Story: एक बालक को नई-नई खेलों में आनंद आता था। एक दिन उसके पिता ने उसे एक छोटी-सी कुल्हाड़ी लाकर दी। अब वह हमेशा कुल्हाड़ी से ही खेलता। एक दिन खेल-खेल में उसने कुल्हाड़ी से आम का एक पेड़ काट डाला। उस समय बालक के पिता बाहर गए हुए थे। बालक पेड़ काटने के बाद भूल गया। शाम को पिता जी घर आए और उन्होंने कटा हुआ पेड़ देखा। पेड़ देखकर वह आग-बबूला हो गए।

पिता जी को पेड़ों से बहुत प्रेम था। उन्होंने बालक से पूछा, “यह आम का पेड़ किसने इतनी बुरी तरह से काटा है।” बालक डर के मारे कांपने लगा और सोचने लगा कि सच बोलेगा तो सजा मिलेगी। हां, झूठ बोलने पर सजा से बचा जा सकता है। फिर बालक के मन ने धिक्कारा, नहीं झूठ बोलने से सजा तो नहीं होगी, किंतु झूठ बोलना भी तो गलत ही है। यह सब सोच कर बालक डरते-डरते बोला, “मैंने काटा है इस पेड़ को।”

बालक की बात सुनकर पिता जी के चेहरे पर प्रसन्नता झलक उठी। वह जानते थे कि पेड़ उनके पुत्र ने ही काटा है, वह तो बस पुत्र की ईमानदारी परख रहे थे। इसके बाद बालक के सिर पर प्रेम से हाथ रखते हुए पिता बोले, “बेटा, तुमने सच बोलकर मेरा मन जीत लिया। मुझे लगा कि तुम झूठ बोलोगे, पर तुमने सच स्वीकार किया। इसलिए आज जो तुमने नुक्सान किया है, मैं उसके लिए सजा नहीं दूंगा परन्तु यह जरूर कहूंगा कि चाहे कुछ भी हो जाए, जीवन में कभी झूठ न बोलना।”

बालक ने प्रण लिया कि वह कभी भी झूठ नहीं बोलेगा। यही बालक आगे चलकर अपनी सच्चाई व मेहनत के बल पर देश का पहला राष्ट्रपति बना। उनका नाम था डा. राजेंद्र प्रसाद।