Edited By Niyati Bhandari,Updated: 10 Jan, 2026 07:57 AM

Kalashtami 2026: सनातन धर्म में कालाष्टमी का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित होता है। मान्यता है कि काल भैरव की उपासना करने से व्यक्ति के जीवन से रोग, भय, नकारात्मक शक्तियां और सभी प्रकार की...
Kalashtami 2026: सनातन धर्म में कालाष्टमी का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित होता है। मान्यता है कि काल भैरव की उपासना करने से व्यक्ति के जीवन से रोग, भय, नकारात्मक शक्तियां और सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं।
साल 2026 में मासिक कालाष्टमी का पहला व्रत 10 जनवरी 2026 (शनिवार) को रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान काल भैरव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और साधक की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
कालाष्टमी क्या है और इसका धार्मिक महत्व
प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान शंकर के भैरव स्वरूप की पूजा की जाती है। भैरव के दो प्रमुख रूप माने गए हैं काल भैरव और बटुक भैरव।
कालाष्टमी के दिन विशेष रूप से काल भैरव की उपासना का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, काल भैरव समय (काल) के स्वामी हैं और वे न्याय, संरक्षण और भय नाशक देवता माने जाते हैं।
Kalashtami 2026 Date and Shubh Muhurat
पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि प्रारंभ: 10 जनवरी 2026 को सुबह 8:24 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 11 जनवरी 2026 को सुबह 10:20 बजे
कालाष्टमी की पूजा निशिता काल (अर्धरात्रि) में करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस व्रत में उदयातिथि नहीं देखी जाती।

काल भैरव पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा समय: 10 जनवरी 2026 की रात्रि 11:55 बजे से 12:46 बजे तक
कालाष्टमी 2026 पूजा विधि (Kalashtami Puja Vidhi)
कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा विशेष विधि से करनी चाहिए। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान करें। स्वच्छ काले या गहरे रंग के वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल की सफाई कर भगवान काल भैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें, व्रत का संकल्प लें। ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का जप करते हुए पूजा आरंभ करें। दीपक, धूप, पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित करें। रात में निशिता काल में पुनः पूजा करें। काल भैरव आरती और भैरव चालीसा का पाठ करें। पूजा के बाद व्रत का पारण करें।
कालाष्टमी पर काले कुत्ते को रोटी खिलाने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काला कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है। कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को रोटी या दूध देने से काल भैरव प्रसन्न होते हैं। अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। शनि और राहु दोष में राहत मिलती है।
काल भैरव उपासना से मिलने वाले लाभ
रोग और भय से मुक्ति
नकारात्मक शक्तियों का नाश
जीवन की बाधाओं का अंत
शत्रुओं से रक्षा
मनोकामनाओं की पूर्ति
आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि
