Kalnemi Kaun Tha: CM योगी के बयान में आया ‘कालनेमि’ कौन था? रामायण के सबसे बड़े छलिया की पूरी कहानी

Edited By Updated: 23 Jan, 2026 12:35 PM

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Shankaracharya VS Yogi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान में ‘कालनेमि’ शब्द का उल्लेख किए जाने के बाद यह नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर कालनेमि कौन था और रामायण में उसकी भूमिका...

Shankaracharya VS Yogi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान में ‘कालनेमि’ शब्द का उल्लेख किए जाने के बाद यह नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर कालनेमि कौन था और रामायण में उसकी भूमिका क्या थी? पौराणिक कथाओं के अनुसार, कालनेमि कोई साधारण राक्षस नहीं बल्कि रावण का अत्यंत मायावी और चालाक अनुचर था, जिसने हनुमान जी को छल से रोकने का प्रयास किया था।

Shankaracharya VS Yogi

कौन था कालनेमि?
रामायण के अनुसार, कालनेमि लंकापति रावण का एक शक्तिशाली दैत्य था, जिसे माया, भ्रम और रूप परिवर्तन में महारत हासिल थी। वह जानता था कि बल और युद्ध कौशल में वह हनुमान जी का मुकाबला नहीं कर सकता, इसलिए उसने छल और कपट का सहारा लिया।

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लक्ष्मण मूर्छा और संजीवनी का प्रसंग
लंका युद्ध के दौरान मेघनाद के प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे। वैद्य सुषेण ने बताया कि यदि सूर्योदय से पहले संजीवनी बूटी नहीं मिली तो लक्ष्मण के प्राण नहीं बचेंगे। इसके बाद भगवान राम ने हनुमान जी को द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी लाने भेजा।

रावण की साजिश और कालनेमि की माया
जब रावण को इस योजना का पता चला तो उसने कालनेमि को हनुमान जी का मार्ग रोकने के लिए भेजा। कालनेमि ने अपनी माया से रास्ते में एक सुंदर आश्रम, सरोवर और मंदिर की रचना की और स्वयं एक तेजस्वी साधु का वेश धारण कर राम-राम का जाप करने लगा।

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साधु के वेश में राक्षस का छल
मार्ग से गुजरते समय हनुमान जी की नजर उस साधु पर पड़ी। कालनेमि ने उन्हें भोजन और विश्राम का प्रस्ताव दिया ताकि संजीवनी लाने में देरी हो जाए। उसने हनुमान जी को सरोवर में स्नान करने के लिए भी प्रेरित किया।

मगरमच्छ से भेद खुला
जैसे ही हनुमान जी सरोवर में उतरे, एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। हनुमान जी ने उसका वध किया, जिसके बाद उस मगरमच्छ के शरीर से एक सुंदर अप्सरा प्रकट हुई। उसने बताया कि वह श्रापवश मगरमच्छ बनी थी और आश्रम में बैठा साधु वास्तव में रावण का भेजा हुआ राक्षस कालनेमि है।

कालनेमि का अंत और हनुमान की विजय
सच्चाई सामने आते ही हनुमान जी ने तुरंत कालनेमि का वध कर दिया। इसके बाद उन्होंने द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी प्राप्त की और समय रहते लक्ष्मण के प्राण बचाए।

क्यों प्रासंगिक है आज ‘कालनेमि’ का उल्लेख?
आज के संदर्भ में ‘कालनेमि’ शब्द का प्रयोग अक्सर छल, कपट और ढोंग करने वालों के प्रतीक के रूप में किया जाता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान में इसका उल्लेख राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का विषय बन गया है।

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