Edited By Sarita Thapa,Updated: 19 Feb, 2026 08:48 AM

धर्म और आस्था की नगरी कटरा में इन दिनों भक्ति के जयकारों के साथ-साथ विरोध की गूंज भी सुनाई दे रही है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा प्रस्तावित ₹250 करोड़ के रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का गुस्सा सातवें आसमान...
Mata Vaishno Devi Temple Ropeway Project Controversy : धर्म और आस्था की नगरी कटरा में इन दिनों भक्ति के जयकारों के साथ-साथ विरोध की गूंज भी सुनाई दे रही है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा प्रस्तावित ₹250 करोड़ के रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि व्यापारियों ने चक्का जाम और कटरा बंद का ऐलान कर दिया है।
क्यों थमा कटरा का पहिया ?
माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के बैनर तले कटरा में पूर्ण बंद का आह्वान किया गया है। बाणगंगा से लेकर मुख्य बाजार तक दुकानें बंद हैं और सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। व्यापारियों का कहना है कि यह उनकी रोजी-रोटी बचाने की आखिरी लड़ाई है।
विरोध के 3 मुख्य कारण
स्थानीय लोगों का दावा है कि इस रोपवे से लगभग 4.5 लाख लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। इनमें घोड़ा-पालकी वाले, पिट्ठू, छोटे दुकानदार और होटल व्यवसायी शामिल हैं। विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि रोपवे बनने से श्रद्धालु सीधे भवन पहुँच जाएंगे, जिससे दर्शनी ड्योढ़ी, बाणगंगा और चरण पादुका जैसे पौराणिक पड़ावों का महत्व कम हो जाएगा। यदि यात्री सीधे रोपवे से जाएंगे, तो कटरा के मुख्य बाजार और रास्ते में आने वाली दुकानों का व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा।
क्यों जरूरी है रोपवे ?
दूसरी ओर, श्राइन बोर्ड और प्रशासन इस प्रोजेक्ट को भक्तों की सुविधा के लिए क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं। 12-13 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई उन भक्तों के लिए मुश्किल होती है जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं। रोपवे उनके लिए वरदान साबित होगा। जो यात्रा पैदल घंटों में पूरी होती है, वह रोपवे के जरिए महज कुछ मिनटों में पूरी हो सकेगी। रोपवे से यात्रा मार्ग पर दबाव कम होगा और भगदड़ जैसी अप्रिय घटनाओं की आशंका घटेगी।
क्या होगा अगला कदम ?
कटरा की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों ने No Ropeway के पोस्टर लगाए हैं। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और श्राइन बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट को तुरंत वापस नहीं लिया, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल और भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर होंगे। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और प्रदर्शनकारियों से बातचीत के रास्ते तलाशने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, व्यापारी किसी भी पुनर्वास पैकेज के बजाय प्रोजेक्ट को पूरी तरह रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।
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