इस कथा से जानें कालचक्र कैसे कर देता है व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट

Edited By Updated: 06 Dec, 2017 08:07 AM

learn from this story how the clock cycle turns the persons intellect corrupted

महाराज युधिष्ठिर के राज्य में एक वैश्य ने अपना मकान एक ब्राह्मण को बेचा। ब्राह्मण ने उस पुराने मकान को गिरवा दिया और उसकी जगह नया मकान बनवाना शुरू किया। उसी समय मकान से सोने की मोहरों से भरा एक घड़ा मिला।

महाराज युधिष्ठिर के राज्य में एक वैश्य ने अपना मकान एक ब्राह्मण को बेचा। ब्राह्मण ने उस पुराने मकान को गिरवा दिया और उसकी जगह नया मकान बनवाना शुरू किया। उसी समय मकान से सोने की मोहरों से भरा एक घड़ा मिला। ब्राह्मण मोहरों से भरा घड़ा लेकर वैश्य के पास पहुंचा। उसने कहा, ‘‘लाला जी, यह घड़ा आपके मकान की जमीन में गड़ा मिला। इसे आपको वापस करने आया हूं।’’ 


वैश्य ने हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘पंडित जी, मकान को मैंने बेच दिया है और उस मकान के बिकने के बाद आप उसके स्वामी हैं। वहां से निकली मोहरें मैं कैसे ले सकता हूं?’’


इस तरह से दोनों सोने की मोहरों से भरे घड़े को लेने को तैयार नहीं हो रहे थे। अंत में किसी तरह उन्होंने घड़ा राजकोष में जमा करवा दिया। महाराज युधिष्ठिर तक जब इस घटना की खबर पहुंची तो उन्होंने भीम से कहा, ‘‘देखो, मेरे राज्य में लोग कितने ईमानदार हैं?’’ 


भीम बोले, ‘‘महाराज, यह द्वापर युग का प्रभाव है। 6 माह बाद कलियुग आएगा। तब देखिएगा प्रजा की नीयत कैसे बदलती है।’’ 


पूरे 6 माह बाद वैश्य और ब्राह्मण घड़े पर अधिकार का झगड़ा लेकर युधिष्ठिर के दरबार में पहुंचे। 


ब्राह्मण का कहना था कि जब उसने मकान खरीद लिया तो उसकी जमीन के अंदर जो भी है वह उसका है। वैश्य का दावा था कि उसने मकान ही बेचा था। जमीन के अंदर दबे धन पर उसका ही अधिकार है क्योंकि वह उसके पूर्वजों का है। महाराजा युधिष्ठिर ने दोनों से पूछा कि 6 महीने पहले तो तुम दोनों इस घड़े को लेने से इंकार कर रहे थे, अब क्या बात हो गई? पास बैठे भीम ने कहा, ‘‘महाराज उस समय इन दोनों की बुद्धि ठीक थी, अब कलिकाल के प्रभाव से दोनों की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। दोनों की नीयत में अंतर आ गया है। ये सब समय का प्रभाव है।’’

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!