Edited By Sarita Thapa,Updated: 02 Feb, 2026 09:06 AM

प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 के पांचवें और सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्वों में से एक, माघ पूर्णिमा के अवसर पर आस्था का एक अद्भुत जनसैलाब उमड़ पड़ा।
Magh Mela 2026 Devotees Holy Bath Record : प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 के पांचवें और सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्वों में से एक, माघ पूर्णिमा के अवसर पर आस्था का एक अद्भुत जनसैलाब उमड़ पड़ा। संगम की रेती पर माघ पूर्णिमा पर न केवल श्रद्धा की डुबकी का है, बल्कि लाखों कल्पवासियों के एक महीने के कठिन तप की पूर्णता का भी प्रतीक है।
आस्था का रिकॉर्ड: संगम पर उमड़ी भीड़
प्रशासनिक अधिकारियों और मेला प्राधिकरण के अनुसार, 1 फरवरी 2026 सुबह से ही श्रद्धालुओं का रेला त्रिवेणी संगम की ओर बढ़ता रहा। आंकड़ों के अनुसार, दोपहर तक करीब 2 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। कड़कड़ाती ठंड और कोहरे की परवाह न करते हुए, श्रद्धालु रात 12 बजे से ही घाटों पर जुटने लगे थे। सुबह 8 बजे तक यह संख्या लगभग 90 लाख तक पहुंच गई थी, जो दोपहर होते-होते 2 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई।
कल्पवास का समापन और 'अमृत' स्नान
माघ पूर्णिमा का दिन उन कल्पवासियों के लिए विशेष रूप से भावुक करने वाला है, जो पिछले एक महीने से संगम तट पर झोपड़ियों में रहकर न्यूनतम संसाधनों के साथ साधना कर रहे थे। आज अंतिम स्नान के बाद ये श्रद्धालु माँ गंगा से आशीर्वाद लेकर अपने घरों की ओर विदा हो रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन संगम का जल 'अमृत' के समान फलदायी होता है।
प्रशासनिक इंतज़ाम और सुरक्षा
सुरक्षा बल: मेला क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी, SDRF और NDRF की टीमें तैनात हैं।
सीसीटीवी और ड्रोन: पूरे 800 हेक्टेयर में फैले मेला क्षेत्र की निगरानी आधुनिक कैमरों और ड्रोनों से की जा रही है।
सुविधाएं: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष बसें और रेलगाड़ियां चलाई जा रही हैं, ताकि स्नान के बाद लोग सुरक्षित अपने गंतव्य को जा सकें।
अगला पड़ाव
माघ पूर्णिमा के साथ ही मुख्य कल्पवास समाप्त हो गया है, लेकिन माघ मेले का आधिकारिक समापन 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के आखिरी स्नान पर्व के साथ होगा।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ