Edited By Prachi Sharma,Updated: 03 Feb, 2026 02:34 PM

Mahabharat Katha : महाभारत में अनेक ऐसे पात्र मिलते हैं, जिनकी जीवन गाथा अत्यंत रोचक और प्रेरणादायक है। इन्हीं में से एक हैं रानी सत्यवती, जो आगे चलकर हस्तिनापुर की महारानी बनीं और पांडवों की परदादी कहलाईं। उनकी जीवन यात्रा साधारण नहीं, बल्कि...
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Mahabharat Katha : महाभारत में अनेक ऐसे पात्र मिलते हैं, जिनकी जीवन गाथा अत्यंत रोचक और प्रेरणादायक है। इन्हीं में से एक हैं रानी सत्यवती, जो आगे चलकर हस्तिनापुर की महारानी बनीं और पांडवों की परदादी कहलाईं। उनकी जीवन यात्रा साधारण नहीं, बल्कि रहस्यमयी और चमत्कारिक घटनाओं से भरी हुई है।
माता गंगा के स्वर्ग लौट जाने के बाद एक दिन राजा शांतनु की नजर यमुना तट पर नाव चलाने वाली एक सुंदर युवती पर पड़ी। वह युवती सत्यवती थीं। राजा उनसे प्रभावित हो गए और बाद में कुछ शर्तों के साथ दोनों का विवाह हुआ। इस विवाह से चित्रांगद और विचित्रवीर्य का जन्म हुआ। आगे चलकर विचित्रवीर्य की पत्नियों से धृतराष्ट्र और पांडु उत्पन्न हुए, जो महाभारत की कथा के प्रमुख पात्र बने।
सत्यवती की जन्म कथा
महाभारत के अनुसार, प्राचीन काल में चेदि देश में उपरिचर वसु नामक प्रतापी राजा शासन करते थे। वे इंद्रदेव के प्रिय मित्र थे और देवताओं के विमान में यात्रा भी करते थे। एक बार शिकार के दौरान उन्हें अपनी पत्नी गिरिका की बहुत याद आई, जिससे वे भावनाओं में बह गए। ऐसी स्थिति में उन्होंने अपना वीर्य एक पक्षी को सौंप दिया और उसे पत्नी तक पहुंचाने को कहा। लेकिन रास्ते में उस पक्षी पर दूसरे पक्षी ने हमला कर दिया, जिससे वह वीर्य नदी में गिर गया।
उसी नदी में आद्रिका नाम की एक अप्सरा रहती थी, जिसे एक श्राप के कारण मछली का रूप धारण करना पड़ा था। अनजाने में उसने उस वीर्य को ग्रहण कर लिया और गर्भवती हो गई।

मछली से जन्मे दो बच्चे
कुछ समय बाद एक मछुआरे ने जाल डालकर उस मछली को पकड़ लिया। जब उसका पेट चीरकर देखा गया, तो उसमें से एक बालक और एक बालिका निकले। यह देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गए। मछुआरा दोनों बच्चों को राजा उपरिचर वसु के पास ले गया।
उसी समय आद्रिका को श्राप से मुक्ति मिली और वह स्वर्गलोक लौट गई। राजा ने बालक को अपना पुत्र स्वीकार किया, जिसका नाम मतस्य रखा गया। आगे चलकर वह एक धर्मनिष्ठ राजा बना।
बालिका को राजा ने मछुआरे को सौंप दिया। वह उसी के घर में पली-बढ़ी और धीरे-धीरे अत्यंत सुंदर बन गई। मछुआरों के बीच रहने के कारण उससे मछली की गंध आती थी, इसलिए उसे मत्स्यगंधा कहा जाने लगा। यही बालिका आगे चलकर सत्यवती के नाम से प्रसिद्ध हुई।
बाद में उनके जीवन में ऋषि पराशर और राजा शांतनु आए, जिनके आशीर्वाद और विवाह से उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। सत्यवती आगे चलकर हस्तिनापुर की महारानी बनीं और महाभारत के वंश की आधारशिला बनीं।
