Edited By Sarita Thapa,Updated: 07 Feb, 2026 10:50 AM

बाबा महाकाल की नगरी अवंतिका में शिव नवरात्रि के अवसर पर प्रतिदिन भगवान के विवाह की रस्में निभाई जा रही हैं। महाशिवरात्रि से पहले मनाए जाने वाले 9 दिवसीय विवाह महोत्सव के चौथे दिन भगवान महाकाल घटाटोप के विशेष रूप में भक्तों को दर्शन देंगे।
Mahakaleshwar Temple Ujjain : बाबा महाकाल की नगरी अवंतिका में शिव नवरात्रि के अवसर पर प्रतिदिन भगवान के विवाह की रस्में निभाई जा रही हैं। महाशिवरात्रि से पहले मनाए जाने वाले 9 दिवसीय विवाह महोत्सव के चौथे दिन भगवान महाकाल घटाटोप के विशेष रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। श्रृंगार की यह परंपरा अत्यंत प्राचीन है, जिसमें महादेव को एक दूल्हे की तरह सजाकर उनके निराकार से साकार होने की यात्रा को दर्शाया जाता है। यह श्रृंगार इतना अद्भुत होता है कि भक्तों को इसमें शिव के विराट और कल्याणकारी स्वरूप का साक्षात्कार होता है।
क्या है घटाटोप श्रृंगार की विशेषता ?
घटाटोप श्रृंगार में भगवान महाकाल के ज्योतिर्लिंग को विभिन्न आभूषणों और वस्त्रों से एक विशिष्ट आकृति प्रदान की जाती है। कटरा, मेखला और दुपट्टा धारण कराया जाता है। मस्तक पर चांदी का मुकुट और छत्र सुशोभित होता है। भगवान के गले में मुंड माला के साथ-साथ ताजे और सुगंधित फलों व फूलों की मालाएं अर्पित की जाती हैं। इस श्रृंगार का मुख्य उद्देश्य बाबा को दूल्हे के रूप में तैयार करना है, जैसे विवाह से पूर्व वर का श्रृंगार किया जाता है।
दिन भर के विशेष अनुष्ठान
शिव नवरात्रि के दौरान मंदिर के गर्भगृह में परंपरा के अनुसार विशेष पूजन किया जा रहा है।
अभिषेक और पाठ: नैवेद्य कक्ष में 11 ब्राह्मणों द्वारा भगवान का एकादश-एकादशनी रुद्राभिषेक और विशेष पाठ किया जा रहा है।
हल्दी-मेहंदी की रस्म: विवाह की परंपराओं के अनुरूप बाबा को प्रतिदिन हल्दी और केसर का उबटन लगाया जा रहा है।
आरती का समय: इस पर्व के दौरान सुबह 10:30 बजे होने वाली भोग आरती का समय बदलकर दोपहर 2:00 बजे किया गया है, ताकि विशेष अनुष्ठान निर्विघ्न संपन्न हो सकें।
भक्तों का उमड़ता सैलाब
प्रशासन का अनुमान है कि इस दिव्य श्रृंगार को देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और मंदिर परिसर को फूलों व रोशनी से दुल्हन की तरह सजाया गया है।
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