Makar Sankranti 2026: हिंदू त्योहारों में जहां काला पहनना माना जाता है अशुभ, वहीं मकर संक्रांति पर क्यों होता है शुभ?

Edited By Updated: 12 Jan, 2026 09:56 AM

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Makar Sankranti 2026: सनातन धर्म में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत शुभ और विशेष माना जाता है। यह पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सूर्य 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसी दिन...

Makar Sankranti 2026: सनातन धर्म में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत शुभ और विशेष माना जाता है। यह पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सूर्य 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसी दिन पूरे देश में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है, गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान का महत्व होता है और दान-पुण्य को अत्यंत फलदायी माना गया है।

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Makar Sankranti Festival: क्यों है यह पर्व इतना खास?
मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन और खगोलीय घटना से भी जुड़ा हुआ त्योहार है। सूर्य के उत्तरायण होने से शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। इसी कारण विवाह, यज्ञ, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व अलग नामों से मनाया जाता है—
उत्तर भारत में खिचड़ी
गुजरात में उत्तरायण
महाराष्ट्र में मकर संक्रांत
दक्षिण भारत में पोंगल

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Makar Sankranti 2026: काले कपड़े पहनना क्यों माना जाता है शुभ?
आमतौर पर हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ, व्रत या त्योहार के अवसर पर काले रंग के कपड़े पहनने से परहेज किया जाता है। काला रंग नकारात्मक ऊर्जा और शोक का प्रतीक माना जाता है। लेकिन मकर संक्रांति एकमात्र ऐसा पर्व है, जब काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना गया है।

ज्योतिषीय कारण
मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार काले रंग का संबंध शनि देव से होता है। ऐसे में इस दिन काले वस्त्र धारण करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में कमी आती है।

यही कारण है कि महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से काले रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यताओं के साथ वैज्ञानिक कारण भी मकर संक्रांति को ऋतु परिवर्तन का पर्व भी माना जाता है। सूर्य के उत्तरायण होने के बाद धीरे-धीरे ठंड कम होने लगती है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन अत्यधिक ठंड रहती है।

वैज्ञानिक दृष्टि से काला रंग ऊष्मा को अधिक अवशोषित करता है, जिससे शरीर को गर्मी मिलती है। इसलिए ठंड से बचाव के लिए भी इस दिन काले कपड़े पहनने की परंपरा विकसित हुई।

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Makar Sankranti 2026: इस दिन क्या करें और क्या न करें?
सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें
तिल, गुड़, खिचड़ी और गर्म वस्त्रों का दान करें
काले वस्त्र पहनना शुभ माना गया है
क्रोध, विवाद और नकारात्मक सोच से बचें
मकर संक्रांति का आध्यात्मिक संदेश

यह पर्व हमें प्रकाश की ओर बढ़ने, नकारात्मकता त्यागने और दान, सेवा व संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश आत्मबल, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

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