Masik Shivratri 2026 Vrat Katha: मासिक शिवरात्रि व्रत के दिन पढ़ें, शिव कृपा दिलाने वाली संपूर्ण व्रत कथा

Edited By Updated: 15 Jan, 2026 02:51 PM

masik shivratri 2026 vrat katha

Masik Shivratri 2026 Vrat Katha In Hindi: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है। पंचांग के अनुसार 16 जनवरी 2026 को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा, उपवास और व्रत कथा का पाठ करने से जीवन...

Masik Shivratri 2026 Vrat Katha In Hindi: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है। पंचांग के अनुसार 16 जनवरी 2026 को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा, उपवास और व्रत कथा का पाठ करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि पर रात्रि के समय शिव पूजन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और अंत समय में शिवलोक की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस व्रत के साथ कथा श्रवण को अनिवार्य माना गया है।

PunjabKesari Masik Shivratri 2026 Vrat Katha

मासिक शिवरात्रि व्रत कथा का धार्मिक महत्व
पुराणों में वर्णित मासिक शिवरात्रि व्रत कथा यह सिखाती है कि अनजाने में की गई शिव भक्ति भी जीवन को बदल सकती है। यह कथा विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है, जो कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।

PunjabKesari Masik Shivratri

Masik Shivratri Vrat Katha (मासिक शिवरात्रि व्रत कथा)
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था। वह जंगल में शिकार करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। आर्थिक तंगी के कारण वह नगर के एक साहुकार का कर्जदार बन गया। लंबे समय तक कर्ज न चुका पाने पर साहुकार ने उसे शिवमठ में बंदी बना लिया।

संयोगवश जिस दिन चित्रभानु को बंदी बनाया गया, उसी दिन मासिक शिवरात्रि थी। शिवमठ में पूरे दिन भजन-कीर्तन और शिव कथा चलती रही। बंदी होने के कारण चित्रभानु ने दिनभर शिव महिमा का श्रवण किया और बिना खाए-पिए रहा, जिससे उसका अनजाने में व्रत भी हो गया।

कुछ समय बाद साहुकार ने चित्रभानु को बुलाकर ऋण चुकाने को कहा। चित्रभानु ने अगले दिन तक कर्ज चुकाने का वचन दिया और शिकार की तलाश में जंगल की ओर निकल पड़ा।

PunjabKesari Masik Shivratri

अनजाने में हुई शिव पूजा
जंगल में भटकते-भटकते चित्रभानु एक तालाब के पास पहुंचा। वहां उसने जल पिया और विश्राम के लिए बेल के पेड़ पर चढ़ गया। उसी पेड़ के नीचे एक शिवलिंग स्थापित था, जो बेलपत्रों से ढका हुआ था।

पेड़ पर बैठे-बैठे चित्रभानु बेलपत्र तोड़ता रहा, जो अनजाने में नीचे शिवलिंग पर गिरते रहे। दिनभर भूखा रहने से उसका व्रत पूरा हो गया और रात्रि के प्रथम प्रहर की शिव पूजा भी संपन्न हो गई।

करुणा, दया और शिव कृपा
रात्रि में क्रमशः तीन हिरणियां और एक हिरण शिकारी के सामने आए। प्रत्येक ने अपनी विवशता, परिवार और बच्चों का हवाला देकर जीवनदान मांगा। चित्रभानु का हृदय करुणा से भर गया और उसने सभी को छोड़ दिया।

हर बार जब वह धनुष पर बाण चढ़ाकर वापस खींचता, तब बेलपत्र शिवलिंग पर गिरते, जिससे रात्रि के चारों प्रहरों की पूजा अनजाने में पूरी हो गई।

चित्रभानु को मिली शिवलोक की प्राप्ति
कुछ समय बाद हिरण अपने पूरे परिवार के साथ लौट आया और अपना वचन निभाया। पशुओं की निष्ठा और सत्य देखकर चित्रभानु का जीवन पूरी तरह बदल गया।

वह नगर लौटा, कर्ज चुकाया और ईमानदारी से जीवन यापन करने लगा। भगवान शिव की कृपा से उसका परिवार समृद्ध हो गया। अंत समय में जब यमदूत आए, तब शिवगणों ने उन्हें भगा दिया और चित्रभानु को शिवलोक ले गए।

कथा का सार
मासिक शिवरात्रि व्रत कथा यह संदेश देती है कि यदि कोई व्यक्ति अनजाने में भी भगवान शिव की आराधना करता है, व्रत रखता है या कथा का श्रवण करता है, तो उसे न केवल सांसारिक सुख मिलता है बल्कि मोक्ष और शिवलोक की प्राप्ति भी होती है।

PunjabKesari Masik Shivratri 2026 Vrat Katha

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

 

Related Story

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!