Maha Shivratri 2026 : शिव-शक्ति का अद्भुत संगम ! महाशिवरात्रि पर वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने काशी को भेजा विशेष उपहार

Edited By Updated: 10 Feb, 2026 12:09 PM

maha shivratri 2026

Maha Shivratri 2026 :  महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर इस वर्ष श्री काशी विश्वनाथ धाम में एक विशेष और भावनात्मक पहल देखने को मिल रही है। इस दिव्य पर्व पर देश के विभिन्न प्रसिद्ध मंदिरों और देवी-देवताओं के प्रतिष्ठानों की ओर से भगवान विश्वनाथ को श्रद्धा...

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Maha Shivratri 2026 :  महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर इस वर्ष श्री काशी विश्वनाथ धाम में एक विशेष और भावनात्मक पहल देखने को मिल रही है। इस दिव्य पर्व पर देश के विभिन्न प्रसिद्ध मंदिरों और देवी-देवताओं के प्रतिष्ठानों की ओर से भगवान विश्वनाथ को श्रद्धा स्वरूप भेंट भेजने की अनूठी परंपरा शुरू की गई है, जिससे उत्सव का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ गया है।

इसी क्रम में शनिवार को श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ओर से भगवान काशी विश्वनाथ के लिए उपहार और प्रसाद मंदिर न्यास कार्यालय में पहुंचाया गया। इस पवित्र भेंट के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट ने श्राइन बोर्ड के प्रति अपना आभार प्रकट किया है। यह पहल महाशिवरात्रि के आयोजन को एक नई आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान कर रही है।

माता वैष्णो देवी, जिन्हें शक्ति का स्वरूप माना जाता है, की ओर से भगवान शिव को अर्पित यह उपहार शक्ति और शिव के शाश्वत संबंध का सुंदर प्रतीक है। इस पावन अवसर पर प्राप्त यह भेंट श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, विश्वास और आध्यात्मिक अनुभूति का माध्यम बन रही है। साथ ही, यह सनातन संस्कृति के मूल मूल्यों को समाज के सामने सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है।

काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने इस शुभ अवसर पर उपहार भेजने के लिए माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का हृदय से धन्यवाद किया है। इसके साथ ही, न्यास ने यह संकल्प भी लिया है कि मां वैष्णो देवी के प्रमुख पर्व पर भगवान विश्वनाथ की ओर से भी उन्हें भेंट भेजी जाएगी, ताकि दोनों धार्मिक केंद्रों के बीच आध्यात्मिक संबंध और अधिक मजबूत हो सकें।

यह पहल न केवल धार्मिक आस्था को गहरा करने वाली है, बल्कि श्रद्धालुओं के बीच आपसी सद्भाव और एकता की भावना को भी बढ़ावा देती है। भगवान शिव की उपासना के इस विशेष पर्व पर यह नवाचार पर्व की महत्ता को और बढ़ा रहा है। श्रद्धालु इसे प्रभु की विशेष कृपा के रूप में देख रहे हैं। साथ ही, यह प्रयास विभिन्न मंदिरों के बीच सहयोग और सामंजस्य की एक नई परंपरा स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

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