Edited By Sarita Thapa,Updated: 22 Jan, 2026 03:33 PM

एक संत के शिष्यों में स्वयं को महाज्ञानी दिखाने की होड़ लगी हुई थी। एक दिन संत ने सभी शिष्यों को अपने पास बुलाया। संत के पास अंगीठी में दहक रहे कोयले गर्मी की तपन दे रहे थे।
Motivational Story : एक संत के शिष्यों में स्वयं को महाज्ञानी दिखाने की होड़ लगी हुई थी। एक दिन संत ने सभी शिष्यों को अपने पास बुलाया। संत के पास अंगीठी में दहक रहे कोयले गर्मी की तपन दे रहे थे। उन्होंने अपने शिष्यों को कहा कि इसमें दहक रहा सबसे बड़ा कोयला निकाल कर मेरे पास रख दो ताकि मैं उसकी गर्मी को नजदीक से महसूस कर सकूं।
शिष्यों ने तुरन्त एक बड़ा अंगारा निकाल कर संत के पास रख दिया। थोड़ी देर में जो अंगारा दहक रहा था, वह धीरे-धीरे ठंडा होने लगा और उस पर राख जमने लगी। कुछ देर बाद वह पूरी तरह से बुझ कर कोयला बन कर रह गया।
संत ने वह कोयला शिष्यों को दिखाते हुए कहा कि तुम सब लोग चाहे जितने तेजस्वी एवं ज्ञानी क्यों न हो, पर अपने जीवन में कोयले जैसी भूल न करना। यह कोयला अगर अंगीठी में रहता तो देर तक गर्मी देता, परन्तु अकेले यह ज्यादा देर तक न टिक सका। अब न तो इसका श्रेय रहा और न ही इसकी प्रतिभा का लाभ हम उठा सकते हैं।

संत ने बात जारी रखते हुए कहा कि हर एक प्रतिभा की अपनी उपयोगिता है। न कोई छोटा है, न कोई बड़ा है। स्वयं को ज्ञानी कहकर व्यक्तिगत प्रतिभा का दिखावा सिर्फ अहंकार है जो पतन और विनाश की ओर ही ले जाता है। अत: सबसे सच्चा प्रेम करें और सबको सम्मान दें। इससे हम आसानी से भेदभाव से दूर रह सकते हैं।

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