Raksha bandhan: रक्षाबंधन त्यौहार पर ‘वोकल फॉर लोकल’ का असर, बाजार से चीनी राखियां गायब

Edited By Updated: 30 Aug, 2023 08:10 AM

raksha bandhan

पिछले कुछ सालों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की त्यौहारों पर ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अपील का असर धरातल पर नजर आ रहा है। उत्तर भारत के सबसे बड़े थोक बाजार, सदर बाजार में इस बार रक्षाबंधन के त्यौहार पर

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नई दिल्ली (प.स.): पिछले कुछ सालों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की त्यौहारों पर ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अपील का असर धरातल पर नजर आ रहा है। उत्तर भारत के सबसे बड़े थोक बाजार, सदर बाजार में इस बार रक्षाबंधन के त्यौहार पर चीन निर्मित राखियां नदारद हैं और सिर्फ भारतीय राखियों की ही भरमार है। इससे दुकानदारों में भी खासा उत्साह है और 
उन्हें इस बार अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है।

सदर बाजार में चीन निर्मित राखियां कम उपलब्ध होने पर स्थानीय दुकानदार बृजेश ने कहा, ‘‘आए दिन चीन सीमा का अतिक्रमण कर हमारे देश में घुस रहा है। हम क्यों चीन का माल बनाएं ? चीन की राखी ने हमारा ग्राहक खरीदना चाहता है और न हम बनाना चाहते हैं।’’ एक अन्य दुकानदार अरविंद कुमार ने कहा, ‘‘अब लोग चीन की राखियां पसंद नहीं करते और इसलिए हम रखते भी नहीं।’’

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक भारतीय राखियों की ही ज्यादा मांग कर रहे हैं। वे चीन की राखी की मांग में कमी का एक प्रमुख कारण उसकी कीमत अधिक और खराब गुणवत्ता को भी बता रहे हैं। दुकानदार संजय यादव ने बताया कि इस बार सदर बाजार में 3 से लेकर 200 रुपए कीमत तक की भारतीय राखियां उपलब्ध हैं जबकि चीनी राखी की शुरूआती कीमत ही 50 रुपए है और ये टूटती भी जल्दी हैं। 

दिल्ली व्यापार महासंघ के अध्यक्ष देवराज बवेजा ने बताया, ‘‘बाजार में 80 फीसदी भारतीय राखियां ही मिल रही हैं और राखियों के बाजार में चीन की हिस्सेदारी मुश्किल से 20 फीसदी तक ही रह गई है। यह भी केवल कच्चे माल के तौर पर ही है।’’

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