Edited By Niyati Bhandari,Updated: 17 Dec, 2019 09:25 AM
एक बार की बात है जब अयोध्या में भगवान राम का राजतिलक हो गया। उसके बाद तय होना था कि सभी लोग भगवान राम की सेवा करें। हनुमान जी भी सेवा करें। तीनों भाई और सुग्रीव आदि इकट्ठे हुए।
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एक बार की बात है जब अयोध्या में भगवान राम का राजतिलक हो गया। उसके बाद तय होना था कि सभी लोग भगवान राम की सेवा करें। हनुमान जी भी सेवा करें। तीनों भाई और सुग्रीव आदि इकट्ठे हुए। उन लोगों ने मंत्रणा की कि ऐसा करो कि हम लोगों को अधिक सेवा मिले और हनुमान को जरा कम मिले, कोई उपाय सोचो। उन्होंने सेवा की एक सूची बनाई। भगवान को कौन-कौन सी सेवा अपेक्षित है, उसकी एक लम्बी सूची बना दी और किस समय कौन-सी सेवा होगी, उसका समय भी लिख दिया। उन सेवा कार्यों के आगे सेवा करने वाले का भी नाम लिख दिया।
हनुमान जी के लिए उसमें कोई जगह नहीं रही। उस सूची को ले जाकर भगवान राघवेन्द्र के सामने रख दिया और बोले, ‘‘महाराज! अस्त-व्यस्तता हो रही थी, कभी कोई आए, कभी कोई आए। व्यवस्था ठीक नहीं हो रही थी। हम लोगों ने विचार किया कि सेवा कार्य सुव्यवस्थित हो इसलिए हमने सभी सेवा कार्यों की सूची बना दी है। आप इसे देखकर स्वीकार कर लें।’’
भगवान ने देखा, फिर मुस्कुराए। उसमें हनुमान का नाम नहीं था। बोले, ‘‘ठीक है, सब कार्य इसमें आ गए, परन्तु हनुमान का नाम नहीं है।’’
उन लोगों ने कहा, ‘‘महाराज! अब कोई सेवा बची नहीं इसलिए उनका नाम कहां लिखें?’’
भगवान ने कहा, ‘‘ठीक है।’’
और उन्होंने उस पर हस्ताक्षर कर दिए। तब हनुमान जी आए। उन्होंने कहा, ‘‘महाराज! एक प्रार्थना है।’’
भगवान ने कहा, ‘‘बोलो, हनुमान।’’
हनुमान जी ने कहा, ‘‘महाराज! एक सेवा बच गई है। वह मुझे दे दी जाए।’’
भगवान राघवेन्द्र ने कहा, ‘‘इसमें तो कोई सेवा बची नहीं है। यदि बची है तो वह तुम्हारी है।’’

हनुमान जी ने कहा, ‘‘महाराज! आप कोई मामूली आदमी तो हैं नहीं। आप राजाधिराज हैं। जब आपको जम्हाई आए,उस समय सामने कोई सेवक रहे जो चुटकी बजा दिया करे।’’
भगवान ने इस कार्य को हनुमान जी को सौंप दिया। लोगों ने कहा, ‘‘यह किस समय लिखा जाए?’’
तब हनुमान जी ने कहा, ‘‘यह तो राघवेन्द्र सरकार से पूछिए। मैं क्या बताऊं? जम्हाई का कोई समय होता है क्या।? रात को आ जाए, दिन में आ जाए, रास्ते में आ जाए, महल में आ जाए, उठने-बैठने-नहाने-सोने में कभी भी आ सकती है।’’
लोगों ने कहा, ‘‘समय क्या लिखें?’’
भगवान ने कहा, ‘‘सब समय लिखो, आठों पहर हनुमान की सेवा रहेगी।’’

अब सभी लोग हैरान हो गए। हम लोग तो समय-समय पर सेवा करेंगे और हनुमान तो हमेशा सेवा में रहेंगे। बात सच्ची है जिनके मन में सेवा का भाव जाग्रत है, उनको सेवा का अवसर मिलता है और जो सेवा से जी चुराते हैं उनके सामने सेवा का अवसर आकर चला जाता है। जो भगवान का हो जाता है उसे भगवान सदा अपने समीप रखने में प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। यदि दूर भेज देते हैं तब भी वह नाराज नहीं होता है।
इससे भगवान की अनुकूलता प्राप्त हो जाती है इसलिए हम भगवान के हो जाएं-यह एक बात है। दूसरी बात, हम भगवान के अनुकूल कार्य करें। उनकी रुचि के अनुसार कार्य करें। जब यह हो जाएगा तब हमारी रुचि अलग नहीं रहेगी। हमारी आकांक्षा अलग नहीं रहेगी। भक्त कौन है? जो अपनी सारी आकांक्षाओं को अपनी सारी इच्छाओं को, अपने सारे मनोभिलाष को भगवान की चाह में मिला दे। अपनी अलग चाह रहे ही नहीं। अपनी चाह पूरी न हो तो कोई परवाह नहीं। केवल और केवल भगवान की चाह पूरी हो। तब क्या होगा? उसे भगवान महत्व देंगे कि यह मेरा है। उसके द्वारा वह कार्य कराएंगे, भगवान जिस कार्य से भगवान का गौरव बढ़ता है उसको भगवान अपने स्तर पर रखेंगे, जिस स्तर पर रखने से भगवान अपने आपको सुखी अनुभव करेंगे।

यह बड़े महत्व की बात है और इसके हम सभी अधिकारी हैं। यह चीज बहुत बड़ी है और बहुत सस्ती भी है। सस्ती इसलिए कि इसमें केवल भाव की आवश्यकता है। हम भाव से अपने को भगवान का बना लें। अपने को अपना न रखें। अपने को जगत का न रखें। अपने को विषयों का न रखें। अपने को कामना, वासना, आसक्ति और ममता का गुलाम न रखें। केवल भगवान का बना लें। तब हम भगवान के हो जाएंगे। यह ममता, आसक्ति और कामना फिर रहेगी ही नहीं।