Ratha Saptami 2026 Date & Time: रथ सप्तमी कब है, शुभ मुहूर्त के साथ जानिए सूर्य पूजा की पूरी विधि

Edited By Updated: 21 Jan, 2026 02:39 PM

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Ratha Saptami 2026: सनातन धर्म में सूर्य देव को ऊर्जा, आरोग्य और जीवन का आधार माना गया है। माघ मास में आने वाला रथ सप्तमी का पर्व सूर्य उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वर्ष 2026 में रथ सप्तमी का पर्व 25 जनवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन...

Ratha Saptami 2026: सनातन धर्म में सूर्य देव को ऊर्जा, आरोग्य और जीवन का आधार माना गया है। माघ मास में आने वाला रथ सप्तमी का पर्व सूर्य उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वर्ष 2026 में रथ सप्तमी का पर्व 25 जनवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य जयंती और रविवार का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इस पर्व का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

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रथ सप्तमी का धार्मिक महत्व (Ratha Saptami Religious Significance)
माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी, अचला सप्तमी, माघी सप्तमी, सूर्य जयंती और महती सप्तमी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सूर्य देव अपने दिव्य रथ पर सवार होकर पहली बार पृथ्वी पर प्रकट हुए थे और सृष्टि को ऊर्जा प्रदान की थी।

पद्म पुराण और भविष्य पुराण में इस व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से सूर्य पूजा करने से पापों का नाश होता है, उत्तम स्वास्थ्य, धन-समृद्धि और समाज में यश की प्राप्ति होती है।

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रथ सप्तमी 2026 कब है? (Ratha Saptami 2026 Date)
पंचांग के अनुसार:
सप्तमी तिथि प्रारंभ:
24 जनवरी 2026, रात 12:40 बजे

सप्तमी तिथि समाप्त: 25 जनवरी 2026, रात 11:11 बजे

उदया तिथि के अनुसार, रथ सप्तमी का पर्व 25 जनवरी 2026 (रविवार) को मनाया जाएगा।

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रथ सप्तमी 2026 स्नान और पूजा का शुभ मुहूर्त (Ratha Saptami Shubh Muhurat)
स्नान का उत्तम समय:
सुबह 5:32 बजे से 7:12 बजे तक

पूजा व दान का शुभ मुहूर्त:
सुबह 11:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक

इन शुभ मुहूर्तों में सूर्य देव की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

सूर्य देव को अर्घ्य देने की विधि (Surya Arghya Vidhi)
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। स्नान के समय सिर पर आक (मदार) के पत्ते रखें। तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें। उसमें लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत, लाल फूल और थोड़ा सा गुड़ मिलाएं। सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों। जल की धारा सूर्य देव को अर्पित करें और धारा के मध्य से सूर्य दर्शन करें।

सूर्य पूजन मंत्र (Surya Mantra)    
ॐ घृणि सूर्याय नमः।

एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥

अर्घ्य देते समय इन बातों का रखें ध्यान (Surya Arghya Rules)
अर्घ्य का जल पैरों पर न गिरे, नीचे पात्र रखें।

बिना स्नान किए सूर्य को जल अर्पित न करें।

पूजा के समय जूते-चप्पल न पहनें।

अर्घ्य का जल बाद में किसी पौधे की जड़ में डाल दें।

रथ सप्तमी सूर्य उपासना का अत्यंत पावन पर्व है। इस दिन श्रद्धा, नियम और विधि-विधान से सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में आरोग्य, तेज, सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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