गुरु साहिब का नाम स्मरण कर उनकी शिक्षाओं पर चले संगत : डा. दविंदर सिंह

Edited By Updated: 11 Feb, 2024 07:39 AM

sant baba attar singh ji

नई दिल्ली (ब्यूरो): समाज सेवा एवं धार्मिक कार्यों में अहम भूमिका निभाने वाली संस्था कलगीधर ट्रस्ट ने बीसवीं सदी के महान तपस्वी राजयोगी संत बाबा अतर

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नई दिल्ली (ब्यूरो): समाज सेवा एवं धार्मिक कार्यों में अहम भूमिका निभाने वाली संस्था कलगीधर ट्रस्ट ने बीसवीं सदी के महान तपस्वी राजयोगी संत बाबा अतर सिंह जी की 97वीं जयंती आज यहां मनाई। इसके उपलक्ष्य में 2 दिवसीय संत समागम दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में बड़े उत्साह और भक्ति के साथ शनिवार को शुरू हुआ। कलगीधर ट्रस्ट बड़ू साहिब के अध्यक्ष डा. दविंदर सिंह ने कार्यक्रम में देश और विदेश से आए श्रद्धालुओं का धन्यवाद किया। साथ ही उन्हें गुरु साहिब का नाम स्मरण कर उनकी शिक्षाओं पर चलने के लिए प्रेरित किया। 

इस मौके पर कलगीधर ट्रस्ट के भाई जगजीत सिंह जी (काका वीर जी) ने संगत को संबोधित करते हुए संत बाबा अतर सिंह जी महाराज के जीवन के बारे में बताया। साथ ही कहा कि मालवा की भूमि की शान चीमा साहिब जिला संगरूर के मुख्य शैक्षणिक और धार्मिक स्थानों में एक महत्वपूर्ण स्थान है। संत जी महाराज, गुरु नानक देव जी की आज्ञा से इस दुनिया में आए, जिन्होंने धन धन साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के आशीर्वाद  से मालवा में 14 लाख मनुष्यों को अमृत छका कर गुरु चरणों से जोड़ा। 

संत अतर सिंह जी महाराज ने 1906 में बड़ू साहिब में लड़कियों के लिए पहला शैक्षणिक संस्थान स्थापित किया और 1913 में मस्तुआना साहिब में अकाल डिग्री कॉलेज की स्थापना की। इस कालेज की स्थापना के साथ, मस्तुआना साहिब शिक्षा का एक महान केंद्र बन गया। इसके अलावा वर्ष 1914 ई. में पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुरोध पर उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पहले कालेज की आधारशिला रखी। लोक कल्याण के कार्य करते हुए संत अतर सिंह जी का 1965 ई. को निधन हो गया। 

​इसके अलावा भाई दविंदर सिंह जी व गोबिंद सिंह बोदल द्वारा आसा दी वार का पाठ किया गया, भाई राव किरपा सिंह और अकाल सहाय निष्काम सत्संग सभा दिल्ली  द्वारा शब्द कीर्तन किया गया। ज्ञानी साहिब सिंह शाहबाद मारकंडा द्वारा कथा की गई, जबकि भाई जसकरण सिंह पटियाला एवं अकाल संगीत विद्यालय, गुरुद्वारा जन्म स्थान, संत अतर सिंह जी महाराज चीमा साहिब द्वारा तंती साजो के  माध्यम से, भाई हरजोत सिंह जख्मी (जालंधर) भाई हरदीप सिंह जी दिल्ली द्वारा शब्द कीर्तन किया गया।

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