Shattila Ekadashi 2026 : षटतिला एकादशी के दिन करें तुलसी चालीसा का पाठ, जीवन में बनी रहेगी खुशहाली और दूर होगी हर दरिद्रता

Edited By Updated: 09 Jan, 2026 12:58 PM

shattila ekadashi 2026

हिन्दू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के रूप में मनाया जाता है, जो अपने आप में आध्यात्मिक और शारीरिक शुद्धि का एक महापर्व है। साल 2026 में यह तिथि और भी विशेष हो गई है, क्योंकि यह मकर संक्रांति के पावन उत्सव के...

Shattila Ekadashi 2026 : हिन्दू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के रूप में मनाया जाता है, जो अपने आप में आध्यात्मिक और शारीरिक शुद्धि का एक महापर्व है। साल 2026 में यह तिथि और भी विशेष हो गई है, क्योंकि यह मकर संक्रांति के पावन उत्सव के साथ मिल रही है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जहां तिल का छह प्रकार से उपयोग जन्म-जन्मानंतर के पापों को धो देता है, वहीं भगवान विष्णु की सबसे प्रिय माता तुलसी की आराधना जीवन के खालीपन को खुशियों से भर देती है। इस पावन अवसर पर तुलसी चालीसा का पाठ न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि घर-परिवार में दरिद्रता का नाश कर सुख-समृद्धि का संचार करता है। तो आइए जानते हैं, कैसे तुलसी चालीसा के पाठ से आप श्रीहरि और लक्ष्मी जी की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

Shattila Ekadashi 2026

।।दोहा तुलसी चालीसा।।

श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।

जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।

नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।

दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।

विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।

भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।

जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।

करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।

कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।

तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।

कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।

वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।

श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।

कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।

छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।

तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।

औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,

देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।

Shattila Ekadashi 2026

वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।

नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।

नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।

नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।

नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।

नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।

नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।

जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।

निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।

करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।

शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।

क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।

मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।

जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।

बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।

प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।

चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।

करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।

पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।

यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।

करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।

है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।

तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।

भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।

यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।

गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।

Shattila Ekadashi 2026

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