ॐ’ में छिपा है सृष्टि का आदि और अंत, जानें ब्रह्म नाद की अद्भुत कहानी

Edited By Updated: 21 Aug, 2026 11:05 AM

the untold story of om

क्या आपने कभी इस पर विचार किया है। जब सृष्टि का अस्तित्व ही नहीं था, तब क्या विद्यमान था। उस काल की कल्पना कीजिए जब समय का भी कोई अस्तित्व नहीं था। समय की भी रचना की गई। समय के पश्चात ध्वनि के रूप में 'ॐ' का प्राकट्य हुआ।

The Untold Story of Om : क्या आपने कभी इस पर विचार किया है। जब सृष्टि का अस्तित्व ही नहीं था, तब क्या विद्यमान था। उस काल की कल्पना कीजिए जब समय का भी कोई अस्तित्व नहीं था। समय की भी रचना की गई। समय के पश्चात ध्वनि के रूप में 'ॐ' का प्राकट्य हुआ। इससे पूर्व ॐ विशुद्ध दिव्यता, ‘सूक्ष्म इति सूक्ष्म’ के रूप में विद्यमान था। वह एक महाशून्य था, वह परम मौन था, वह पूर्णत्व था।

श्लोक कहता है:
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

तात्पर्य यह कि अनंत में अनंत का संयोजन अनंत है, अनंत से अनंत का निष्कासन भी अनंत ही है, अनंत का अनंत से गुणन अनंत है और अनंत को अनंत से विभाजित करने पर भी अनंत ही अवशिष्ट रहता है। इसी का द्योतक ‘ॐ’ अपने भीतर सब कुछ समाहित किए हुए है।

अब ॐ की अनुभूति प्राप्त करने के लिए आप यह कर सकते हैं
रात्रि के समय आकाश की ओर देखें, अपनी दृष्टि किसी एक बिंदु पर केंद्रित करें और दृष्टि हटाए बिना दाएं से बाएं घूमना आरंभ करें। कुछ समय पश्चात रुकें, अपनी आंखें बंद करें और आंतरिक रूप से उस बिंदु को एकाग्र होकर देखें। आपका अनुभव क्या रहा? आपने अपने भीतर जो अनुभव किया, वह ॐ का केवल एक सूक्ष्मतम अंश मात्र है। ॐ, जिससे सृष्टि का आरंभ हुआ और अंततः जिसमें सब कुछ विलीन हो जाएगा।

ॐ केवल एक ध्वनि नहीं है, यह ब्रह्मांड (सृष्टि) का सार तत्व है, जिसे ‘ब्रह्म नाद’ भी कहा जाता है। ॐ समय के उपरांत आया, अतः एक अर्थ में यह समय से बंधा भी है और फिर भी इससे परे व स्वतंत्र है। इसे समझने के लिए, जब कोई गुरु ॐ का उच्चारण करें, तो उसे ध्यानपूर्वक सुनें। आप पाएंगे कि यह अनगिनत छोटे ॐ का एक निरंतर प्रवाह है। वह निरंतर ॐ शाश्वत है, जबकि समय से बंधे छोटे ॐ भौतिक सृष्टि के नश्वर पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। हममें से प्रत्येक स्वयं में एक ॐ है, जिसमें गुरु के सानिध्य में एक अखंड ॐ बनने का सामर्थ्य है। वास्तव में, यही मोक्ष और परम सत्य का मार्ग है।

ॐ की अनुभूति संगीत की सीडी, टेलीविज़न कार्यक्रमों अथवा सामाजिक सम्मेलनों में निहित नहीं है। यह गुरु और शिष्य के मध्य का एक प्रत्यक्ष व व्यक्तिगत संबंध है। आपने कई स्थानों पर ॐ के विषय में पढ़ा या जाना होगा। ॐ को 'अ-उ-म' अर्थात 'अ', 'उ' और 'म' की ध्वनियों के रूप में, किंतु बहुत कम लोग ॐ के चौथे घटक से परिचित हैं, जो कि ‘मौन’ (निःशब्दता) है। ॐ के निरंतर प्रवाह में मौन सहित ये चारों घटक विद्यमान हैं, क्योंकि सृष्टि परस्पर विरोधी तत्वों का ही कुल योग है। सृष्टि का सार होने के नाते ॐ भी ठीक वही है- ध्वनि और मौन, प्रकाश और अंधकार, रात और दिन, सत्य और असत्य, नश्वर और शाश्वत, तथा पुरुष और प्रकृति का सम्मिश्रण। पुरुष और प्रकृति के ये दो पहलू मिलकर ही सृष्टि को स्वरूप प्रदान करते हैं।

ॐ का जप अपने भीतर सृष्टि की अभूतपूर्व शक्ति समेटे हुए है, जो आपके विचारों को मूर्त रूप प्रदान करती है। परंतु ॐ का यह प्रभाव तभी संभव है, जब इसका सही उच्चारण गुरु के मार्गदर्शन में किया जाए। जहां विभिन्न मंत्रों का प्रभाव शरीर के भिन्न-भिन्न केंद्रों पर पड़ता है, वहीं ॐ के स्पंदन मूलाधार से आज्ञा चक्र तक, पैर के अंगूठे से लेकर सिर तक, प्रत्येक कोशिका में अनुभूत होते हैं। 

जैसे-जैसे कोई साधक साधना के मार्ग पर अग्रसर होता है, उसका ॐ शाश्वत ॐ की आवृत्ति (फ़्रीक्वेंसी) के समीप पहुंचने लगता है। कोई जीव अथवा ऊर्जा जितनी सूक्ष्म होगी, वह ॐ के उतनी ही निकट होगी। इसका एक प्रमुख उदाहरण सूर्य है। आपको यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि सूर्य भी ॐ की ध्वनि उत्सर्जित करता है और वह पृथ्वी के समस्त जीवों के लिए शक्ति का स्रोत है। इस तथ्य की पुष्टि यू.के. के शेफ़ील्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने भी की है, जिन्होंने सूर्य की ध्वनि को रिकॉर्ड किया था।
 

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!