Ujjain Mahakaleshwar : महाकाल के गर्भगृह तक आम भक्त की पहुंच क्यों बंद ? सांसद ने उठाया गर्भगृह दर्शन पर बड़ा सवाल

Edited By Updated: 30 Dec, 2025 01:40 PM

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Ujjain Mahakaleshwar : महाकालेश्वर मंदिर में गर्भगृह दर्शन और जलाभिषेक की वर्तमान व्यवस्था को लेकर आलोट से सांसद अनिल फिरोजिया ने कड़ा असंतोष जताया है। दिशा समिति की बैठक में उन्होंने मंदिर प्रबंधन की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले आम और...

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Ujjain Mahakaleshwar : महाकालेश्वर मंदिर में गर्भगृह दर्शन और जलाभिषेक की वर्तमान व्यवस्था को लेकर आलोट से सांसद अनिल फिरोजिया ने कड़ा असंतोष जताया है। दिशा समिति की बैठक में उन्होंने मंदिर प्रबंधन की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले आम और स्थानीय श्रद्धालु आसानी से गर्भगृह में जाकर भगवान महाकाल को स्वयं जल अर्पित कर पाते थे, लेकिन अब यह अवसर सामान्य भक्तों, खासकर बुजुर्गों के लिए लगभग समाप्त हो गया है।

मां का उदाहरण देकर जताया दर्द
सांसद ने इस मुद्दे को व्यक्तिगत अनुभव से जोड़ते हुए अपनी 85 वर्षीय मां का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनकी मां पिछले लगभग 60 वर्षों से हर सोमवार नियमित रूप से महाकाल का जलाभिषेक करती रही हैं। हाल ही में दोनों पैरों में फ्रैक्चर होने के बावजूद वे दर्शन के लिए मंदिर पहुंचती हैं, लेकिन मौजूदा नियमों के कारण उन्हें गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में वे बाहर खड़े होकर पुजारी को जल सौंप देती हैं और बिना गर्भगृह दर्शन के लौट आती हैं।

बुजुर्ग श्रद्धालुओं की बढ़ती परेशानी
अनिल फिरोजिया ने कहा कि यदि उनकी मां जैसी वृद्ध महिला को यह कठिनाई झेलनी पड़ रही है, तो आम बुजुर्ग और कमजोर श्रद्धालुओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने जिला कलेक्टर से मांग की कि प्रतिदिन कम से कम दो घंटे का निश्चित समय तय किया जाए, जिसमें सामान्य श्रद्धालुओं को गर्भगृह में जाकर स्वयं जलाभिषेक करने की अनुमति दी जाए।

ईश्वर के दरबार में सब समान
सांसद ने साफ कहा कि भगवान के सामने कोई वीआईपी या विशेष नहीं होता। राजा हो या आम व्यक्ति, सभी समान हैं। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि कुछ चुनिंदा लोगों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है, तो आम भक्तों को इससे वंचित क्यों रखा जाए। उनका सुझाव था कि भीड़ या त्योहारों के दिनों में नियम सख्त किए जा सकते हैं, लेकिन सामान्य दिनों में एक निश्चित समय-स्लॉट अवश्य होना चाहिए।

श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा विषय
अनिल फिरोजिया ने कहा कि यह मामला किसी एक परिवार या व्यक्ति का नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, जिनकी जीवनभर की इच्छा होती है कि वे अपने हाथों से भगवान महाकाल को जल अर्पित करें। उन्होंने बताया कि कलेक्टर ने इस सुझाव पर विचार करने और इसे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।

सांसद का मानना है कि यदि मंदिर प्रशासन भक्तों की भावनाओं को समझते हुए दर्शन व्यवस्था में संतुलित बदलाव करता है, तो बुजुर्ग और असहाय श्रद्धालुओं को भी सम्मानपूर्वक जलाभिषेक का अवसर मिल सकेगा। इससे महाकाल मंदिर की दर्शन प्रणाली और अधिक न्यायसंगत, सहज और भक्त-अनुकूल बन सकती है।

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