Edited By Sarita Thapa,Updated: 17 Jan, 2026 02:46 PM

घर का मंदिर वह पवित्र कोना होता है जहां से पूरे परिवार को सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है। हम अपनी श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ ईश्वर की मूर्तियां स्थापित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत स्वरूप या दोषपूर्ण मूर्तियों का चुनाव आपके...
Vastu for idols in pooja room : घर का मंदिर वह पवित्र कोना होता है जहां से पूरे परिवार को सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है। हम अपनी श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ ईश्वर की मूर्तियां स्थापित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत स्वरूप या दोषपूर्ण मूर्तियों का चुनाव आपके जीवन में अशांति और आर्थिक तंगी का कारण बन सकता है। वास्तु शास्त्र और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हर मूर्ति की अपनी एक विशिष्ट ऊर्जा होती है और घर के भीतर केवल सौम्य और आशीर्वाद देने वाली ऊर्जा का ही वास होना चाहिए। अक्सर हम अनजाने में या केवल सुंदरता देखकर ऐसी मूर्तियां घर ले आते हैं जो गृहस्थ जीवन के लिए उपयुक्त नहीं होतीं। शास्त्रों का स्पष्ट मानना है कि यदि मंदिर में रखी गई मूर्तियों की ऊर्जा घर के वातावरण से मेल नहीं खाती, तो यह तरक्की में बाधा, स्वास्थ्य हानि और आपसी कलह का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। तो आइए जानते हैं कि पूजा घर में भूलकर भी कैसी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए।
खंडित या टूटी हुई मूर्तियां
वास्तु शास्त्र का सबसे पहला नियम है कि पूजाघर में कभी भी खंडित मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। चाहे वह थोड़ी सी ही क्यों न चटक गई हो, ऐसी मूर्ति की पूजा करना अशुभ माना जाता है। यह मानसिक तनाव और कार्यों में बाधा का कारण बनती है। ऐसी मूर्तियों को पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए।
देवी-देवताओं का रौद्र रूप
घर के मंदिर में हमेशा शांत और सौम्य मुद्रा वाली मूर्तियां रखनी चाहिए। देवी काली का विकराल रूप, भगवान शिव का तांडव करते हुए स्वरूप या भगवान हनुमान का लंका दहन वाला चित्र घर में नहीं रखना चाहिए। माना जाता है कि रौद्र रूप वाली मूर्तियां घर के सदस्यों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और क्रोध बढ़ाती हैं।
एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियां
अक्सर लोग श्रद्धावश एक ही भगवान की कई मूर्तियां रख लेते हैं। वास्तु के अनुसार, एक ही देवी-देवता की तीन या उससे अधिक मूर्तियां या चित्र एक ही जगह पर नहीं होने चाहिए। इससे घर में गृह-क्लेश की स्थिति पैदा हो सकती है और धन का आगमन रुक सकता है।

आमने-सामने न हों मूर्तियां
मंदिर में मूर्तियों को इस तरह न रखें कि वे एक-दूसरे के आमने-सामने हों। विशेष रूप से गणेश जी की पीठ कभी भी दिखाई नहीं देनी चाहिए, क्योंकि उनकी पीठ में 'दरिद्रता' का वास माना जाता है। मूर्तियों का मुख हमेशा सामने की ओर या साधक की ओर होना चाहिए।
पूर्वजों की तस्वीरें
कई लोग भगवान के साथ ही अपने मृत पूर्वजों की तस्वीरें भी रख देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, देवता और पितर दोनों पूजनीय हैं लेकिन उनके स्थान अलग होने चाहिए। भगवान के मंदिर में पूर्वजों की तस्वीर रखने से देव-दोष लगता है, जिससे घर की उन्नति रुक सकती है।
युद्ध या विनाश दर्शाने वाली तस्वीरें
महाभारत के युद्ध का दृश्य या किसी असुर का वध करते हुए उग्र तस्वीरें पूजाघर में रखने से बचें। ऐसी तस्वीरें परिवार में कलह और अशांति का माहौल पैदा करती हैं।

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