Edited By Rohini Oberoi,Updated: 13 Jan, 2026 09:37 AM

खाड़ी देश ईरान में जारी भीषण नागरिक अशांति और सरकार के हिंसक दमन के बीच अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने सोमवार 12 जनवरी 2026 को एक आपातकालीन सुरक्षा चेतावनी जारी की है जिसमें ईरान में मौजूद सभी अमेरिकी नागरिकों को 'बिना देरी...
इंटरनेशनल डेस्क। खाड़ी देश ईरान में जारी भीषण नागरिक अशांति और सरकार के हिंसक दमन के बीच अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने सोमवार 12 जनवरी 2026 को एक आपातकालीन सुरक्षा चेतावनी जारी की है जिसमें ईरान में मौजूद सभी अमेरिकी नागरिकों को 'बिना देरी किए' देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। व्हाइट हाउस की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि यदि ईरान में हिंसा नहीं रुकी तो अमेरिका सैन्य विकल्पों (Airstrikes) पर भी विचार कर सकता है।
सुलगता ईरान: 600 से ज्यादा मौतें और इंटरनेट ब्लैकआउट
ईरान में पिछले दो हफ्तों से महंगाई, आर्थिक बदहाली और शासन के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन हो रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों (HRANA) के मुताबिक सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक 646 लोग मारे जा चुके हैं जिनमें 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारी शामिल हैं। ईरान सरकार ने 8 जनवरी से ही पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया है जिससे दुनिया का संपर्क वहां से लगभग कट गया है। करीब 10,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया है।
दोहरी नागरिकता वालों को सबसे बड़ा खतरा
अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) ने विशेष रूप से ईरानी-अमेरिकी (Dual Citizens) नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है:
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ईरानी कानून का खतरा: ईरान सरकार दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देती। वहां पकड़े जाने पर इन नागरिकों को ईरानी मानकर उन पर जासूसी के आरोप या सख्त शरिया कानून थोपे जा सकते हैं।
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गिरफ्तारी का आधार: अमेरिकी पासपोर्ट रखना या अमेरिका से किसी भी तरह का संबंध होना ही पूछताछ और प्रताड़ना के लिए काफी है।
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सरकारी मदद का अभाव: ईरान में अमेरिका का कोई दूतावास नहीं है इसलिए संकट के समय अमेरिकी सरकार नागरिकों तक सीधी मदद नहीं पहुंचा पाएगी। मदद के लिए केवल स्विट्जरलैंड के दूतावास पर निर्भर रहना होगा।
उड़ानें रद्द, सड़क मार्ग ही एकमात्र सहारा
ईरान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय विमानन सेवाओं ने हाथ खींच लिए हैं। एमिरेट्स, फ्लाईदुबई, तुर्किश एयरलाइंस और लुफ्थांसा जैसी बड़ी एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें 16 जनवरी तक रद्द या सीमित कर दी हैं। अमेरिका ने अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे तुर्किये (Turkey) या आर्मेनिया (Armenia) की सीमाओं के रास्ते सड़क मार्ग से निकलने की कोशिश करें।