भारत-अमेरिका तनाव के बीच इस देश ने मारी बाजी, तेल के 'खेल' में रूस को किया रिप्लेस

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 08:28 PM

amidst the indo us tension this country won replaced russia in  game  of oil

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर नाराज़गी जताई थी। उन्होंने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ (आयात शुल्क) लगा दिया था। इससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया और दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता भी...

इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर नाराज़गी जताई थी। उन्होंने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ (आयात शुल्क) लगा दिया था। इससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया और दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता भी रुक गई थी।

2 फरवरी को हुआ बड़ा ऐलान

2 फरवरी को ट्रंप ने घोषणा की कि भारत और अमेरिका एक नए व्यापार समझौते पर सहमत हो गए हैं। ट्रंप के अनुसार, इस समझौते के तहत भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करेगा। इसके बदले में अमेरिका ने भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैरिफ हटा दिया।साथ ही, भारत पर लगाया गया 25% रेसिप्रोकल (पारस्परिक) टैरिफ भी घटाकर 18% कर दिया गया। इसके बाद अमेरिका की ओर से बार-बार दावा किया गया कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद कर रहा है। वहीं रूस का कहना था कि भारत ऐसा कोई कदम नहीं उठा रहा। भारत सरकार ने इस मामले में खुलकर कुछ नहीं कहा, केवल इतना बयान दिया कि देश के हित में तेल के स्रोतों में विविधता (डायवर्सिफिकेशन) रखी जाएगी।

आंकड़ों ने साफ की स्थिति

अब सामने आए व्यापारिक आंकड़ों से पता चलता है कि भारत ने वास्तव में रूस से तेल खरीद में बड़ी कटौती की है। जनवरी में रूस से भारत के माल (मर्चेंडाइज) आयात में 40.5% की गिरावट दर्ज की गई। एक साल पहले भारत रूस से 4.81 अरब डॉलर का माल खरीदता था। अब यह घटकर 2.86 अरब डॉलर रह गया है। इस गिरावट की मुख्य वजह भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में कमी करना है। रूस से होने वाले कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 80% रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग सूत्रों के आंकड़े बताते हैं कि भारत की कुल तेल खरीद में रूसी कच्चे तेल का हिस्सा 2022 के अंत के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया है।

मध्य-पूर्व से बढ़ी खरीद, सऊदी फिर बना नंबर-1 सप्लायर

जनवरी में भारत ने मध्य-पूर्वी देशों से तेल की खरीद 2022 के बाद सबसे अधिक की। इसके साथ ही सऊदी अरब एक बार फिर भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है। इस तरह तेल के बाजार में रूस पीछे खिसक गया है और सऊदी अरब ने उसकी जगह ले ली है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदली थी तस्वीर

फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था। युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए, जिनमें तेल निर्यात पर भी पाबंदियां शामिल थीं। प्रतिबंधों के कारण रूस ने भारत और चीन जैसे एशियाई देशों को रियायती दरों पर तेल देना शुरू किया। इससे भारतीय रिफाइनरियों ने बड़े पैमाने पर रूसी तेल खरीदना शुरू किया और रूस भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया। कुछ समय में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 1% से बढ़कर लगभग 40% तक पहुंच गई थी। लेकिन अब स्थिति बदल रही है और रूस से खरीद में तेजी से गिरावट आ रही है।

चीन बना रूस का सबसे बड़ा खरीदार

नवंबर से चीन रूस से समुद्री रास्ते से आने वाले कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। अनुमान है कि फरवरी में चीन लगभग 20.7 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल आयात करेगा। जनवरी में यह आंकड़ा 17 लाख बैरल प्रतिदिन था। इससे साफ है कि रूस का झुकाव अब चीन की ओर अधिक हो गया है।

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!