Edited By Tanuja,Updated: 14 Feb, 2026 03:33 PM

बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के बाद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही। बम विस्फोट और गुटीय झड़पों में तीन लोगों की मौत हो गई। BNP की जीत के बीच कानून-व्यवस्था, आंतरिक संघर्ष और बढ़ते इस्लामी उग्रवाद को लेकर नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
International Desk: बांग्लादेश में राष्ट्रीय संसद चुनाव के तुरंत बाद हिंसा और अराजकता की घटनाएं सामने आने लगी हैं। शुक्रवार और शनिवार को अलग-अलग घटनाओं में बम विस्फोट और गुटीय झड़पों के कारण कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, राजधानी ढाका से करीब 302 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम स्थित चपाई नवाबगंज जिले में शनिवार तड़के एक घर में जोरदार धमाका हुआ। यह विस्फोट उस वक्त हुआ जब घर के भीतर कच्चे बम, जिन्हें स्थानीय तौर पर ‘कॉकटेल’ कहा जाता है, तैयार किए जा रहे थे। धमाके में घर की ईंट की दीवारें ढह गईं और टिन की छत उड़ गई। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
उधर, चुनावी नतीजों के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़क उठी। स्थानीय मीडिया के अनुसार, गुरुवार रात से शुक्रवार शाम तक अलग-अलग घटनाओं में कम से कम एक व्यक्ति की जान चली गई और 36 लोग घायल हुए। ये झड़पें राजनीतिक दलों के अंदरूनी गुटों, प्रतिद्वंद्वी समर्थकों और तोड़फोड़ की घटनाओं से जुड़ी थीं।मुंशीगंज जिले के सदर उपजिला में Bangladesh Nationalist Party से जुड़े दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच हिंसक टकराव हुआ। इस दौरान 30 वर्षीय मोहम्मद जसीम नायब को बेरहमी से पीटा गया। सिर पर तेज हथियार से हमला किए जाने के बाद उन्हें गंभीर हालत में ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि इलाके में पहले से चले आ रहे विवाद चुनावी मुद्दों को लेकर हिंसक रूप ले बैठे।
इसी बीच BNP की निर्णायक जीत के साथ पार्टी अगली सरकार बनाने जा रही है और इसके शीर्ष नेता Tarique Rahman के नेतृत्व में देश का नया राजनीतिक अध्याय शुरू होने वाला है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनाव के बाद फैली अशांति, गुटीय हिंसा और बढ़ते इस्लामी उग्रवाद पर काबू पाना होगी। खासतौर पर Muhammad Yunus के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के 18 महीनों के दौरान जो अस्थिरता देखी गई, उसके बाद हालात को सामान्य करना आसान नहीं होगा। देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि नई सरकार कानून-व्यवस्था बहाल कर लोकतांत्रिक स्थिरता की दिशा में कितनी तेजी से कदम उठाती है।