Edited By Tanuja,Updated: 24 Feb, 2026 11:41 AM

अमेरिका ने जिनेवा में खुलासा किया कि चीन ने छह साल पहले गुप्त परमाणु परीक्षण किया था। ‘न्यू स्टार्ट’ संधि समाप्त होने के बाद अमेरिका ने देशों से चीन और रूस पर निरस्त्रीकरण के लिए दबाव बनाने की अपील की। चीन के तेजी से बढ़ते परमाणु भंडार पर चिंता जताई...
Washington: वैश्विक परमाणु संतुलन को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिका ने दावा किया है कि चीन ने लगभग छह साल पहले गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण किया था।अमेरिका के शस्त्र नियंत्रण और अप्रसार ब्यूरो के सहायक विदेश मंत्री Christopher A. Ford (क्रिस्टोफर यिआव के रूप में संदर्भित) ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरस्त्रीकरण सम्मेलन में यह खुलासा किया। उन्होंने अन्य देशों से आग्रह किया कि वे चीन और रूस पर परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए दबाव बनाएं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और रूस के बीच अंतिम प्रमुख परमाणु हथियार समझौता New START समाप्त हो चुका है। इस संधि के खत्म होने के बाद दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के हथियारों पर लगी सीमाएं भी हट गई हैं।
यिआव ने कहा कि ‘न्यू स्टार्ट’ की सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसमें चीन के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम को शामिल नहीं किया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रूस के गैर-रणनीतिक परमाणु हथियारों के विशाल भंडार पर भी संधि में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि चीन ने “जानबूझकर और बेरोक-टोक” अपने परमाणु हथियार भंडार में भारी विस्तार किया, जबकि उसने पहले ऐसा न करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने चिंता जताई कि चीन के उद्देश्यों और लक्ष्यों को लेकर पारदर्शिता की भारी कमी है। उनके अनुसार, “चीन अगले चार या पांच वर्षों में परमाणु शक्ति के मामले में बराबरी की स्थिति में पहुंच सकता है।”
यह बयान Geneva में आयोजित संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरस्त्रीकरण सम्मेलन के दौरान दिया गया। अमेरिकी प्रतिनिधि ने सोमवार को रूसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और मंगलवार को चीनी तथा अन्य देशों के प्रतिनिधियों से बातचीत की योजना बनाई। अमेरिका पहले ही परमाणु शक्ति संपन्न देशों जैसे France और United Kingdom के साथ कई दौर की बैठक कर चुका है। ‘न्यू स्टार्ट’ के समाप्त होने के बाद विश्व परमाणु संतुलन अस्थिर होता दिख रहा है। यदि चीन का परमाणु कार्यक्रम तेजी से बढ़ता है, तो अमेरिका-रूस-चीन के बीच नई हथियार दौड़ शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। निरस्त्रीकरण की कोशिशें अब और कठिन हो सकती हैं, क्योंकि पारदर्शिता और विश्वास दोनों ही कमज़ोर पड़ते दिख रहे हैं।