वेनेजुएला के बाद सबसे ज्यादा खतरे में यह देश ! ट्रंप की धमकी सहमे लोग, क्या रूस बनेगा आखिरी सहारा?

Edited By Updated: 06 Jan, 2026 01:57 PM

cuba is left reeling in the aftermath of the venezuela strike

वेनेजुएला में मादुरो सरकार गिरने और अमेरिकी हमले में 32 क्यूबाई सुरक्षा अधिकारियों की मौत के बाद क्यूबा में संकट गहराता दिख रहा है। तेल आपूर्ति रुकने की आशंका से जनता डरी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्यूबा के लिए आर्थिक और ऊर्जा आपदा बन सकता...

International Desk: वेनेजुएला में हुए अमेरिकी हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद क्यूबा में गहरी चिंता और शोक का माहौल है। इस हमले में 32 क्यूबाई सुरक्षा अधिकारियों की मौत के बाद सोमवार को पूरे देश में झंडे झुकाकर शोक मनाया गया।  इस घटनाक्रम ने क्यूबा के आम नागरिकों के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि मादुरो सरकार के पतन का उनके देश के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा। क्यूबा और वेनेजुएला के बीच दशकों पुराने गहरे रिश्ते रहे हैं। क्यूबाई सैनिक और सुरक्षा एजेंट लंबे समय तक वेनेजुएला के राष्ट्रपति के अंगरक्षक रहे हैं, जबकि वेनेजुएला के तेल आयात ने क्यूबा की कमजोर अर्थव्यवस्था को वर्षों तक संभाले रखा।

 

क्यूबाई अधिकारियों ने सप्ताहांत में हमले में 32 सुरक्षा अधिकारियों के मारे जाने की पुष्टि की, लेकिन विस्तृत जानकारी नहीं दी। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि मादुरो को हटाना क्यूबा की सरकार को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। शनिवार को ट्रंप ने कहा कि मादुरो की विदाई के बाद क्यूबा की पहले से बदहाल अर्थव्यवस्था और भी खराब हो जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, करीब एक करोड़ आबादी वाला क्यूबा, तेल संसाधनों से समृद्ध वेनेजुएला पर असाधारण रूप से निर्भर रहा है, जबकि वेनेजुएला की जनसंख्या क्यूबा से लगभग तीन गुना अधिक है।

 

आम जनता में डर और निराशा
क्यूबा के लोग पहले ही लगातार बिजली कटौती और बुनियादी खाद्य पदार्थों की कमी से जूझ रहे हैं। अब वे ऐसे भविष्य की आशंका कर रहे हैं जिसकी उन्होंने पहले कभी कल्पना नहीं की थी। 75 वर्षीय बर्ता लूज सिएरा मोलीना ने कहा, “मैं बात नहीं कर सकती, मेरे पास शब्द नहीं हैं।” वहीं 63 वर्षीय रेगिना मेंडेज ने कहा,
“हमें मजबूत रहना होगा।”

 

तेल आपूर्ति रुकने का खतरा
क्यूबा के ऊर्जा विशेषज्ञ जॉर्ज पिनोन के अनुसार, मादुरो सरकार पिछले तीन महीनों में औसतन 35,000 बैरल तेल प्रतिदिन क्यूबा को भेज रही थी, जो देश की कुल मांग का लगभग एक चौथाई था। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या अमेरिका वेनेजुएला को क्यूबा को तेल निर्यात करने की अनुमति देगा? इसका हमारे पास कोई जवाब नहीं है।”पिनोन ने बताया कि पहले मेक्सिको रोजाना 22,000 बैरल तेल क्यूबा भेजता था, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की सितंबर में मेक्सिको सिटी यात्रा के बाद यह घटकर 7,000 बैरल रह गया। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इस समय मेक्सिको क्यूबा की मदद करेगा।”

 

रूस आखिरी सहारा?
वाशिंगटन स्थित अमेरिकन यूनिवर्सिटी के क्यूबाई अर्थशास्त्री रिकार्डो टोरेस ने चेतावनी दी कि अगर वेनेजुएला से तेल आपूर्ति बंद होती है तो क्यूबा के लिए यह आपदा होगी। पिनोन के अनुसार, क्यूबा के पास अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं और अब उसका आखिरी बड़ा सहयोगी रूस बचा है, जो सालाना करीब 20 लाख बैरल तेल भेजता है।  हालांकि टोरेस ने सवाल उठाया कि क्या रूस यूक्रेन संकट के बीच अमेरिका से टकराव का जोखिम लेकर क्यूबा की खुलकर मदद करेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि क्यूबा को अपने निजी क्षेत्र और बाजार को खोलना चाहिए और सार्वजनिक खर्च कम करना चाहिए, ताकि चीन जैसी ताकतें उसकी मदद के लिए आगे आ सकें। फिलहाल, मादुरो सरकार के पतन के बाद क्यूबा एक गहरे राजनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है।

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