Edited By Tanuja,Updated: 01 Nov, 2026 02:33 PM
महंगाई, असमानता और खराब सार्वजनिक सेवाओं के खिलाफ यूरोप में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। फ्रांस में 3.20 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे और 560 से ज्यादा गिरफ्तार हुए। जर्मनी और स्विट्जरलैंड में आगजनी-पथराव हुआ, जबकि स्पेन, इटली और नीदरलैंड में...
Paris: यूरोप में सरकारों की नीतियों, महंगाई और सार्वजनिक सुविधाओं की बदहाल स्थिति के खिलाफ लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। फ्रांस में लगातार तीसरे सप्ताह विरोध प्रदर्शन हुए, वहीं जर्मनी और स्विट्जरलैंड में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। कई शहरों में दुकानों को निशाना बनाया गया, वाहनों में आग लगाई गई और पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछार और रबर की गोलियों का इस्तेमाल करना पड़ा।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को देशभर में 3.20 लाख से अधिक लोगों ने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। ये प्रदर्शन बढ़ती महंगाई, सामाजिक असमानता, कमजोर होती सार्वजनिक सेवाओं और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार की नीतियों के खिलाफ हो रहे हैं।
🇫🇷 WATCH: Molotov cocktails hit police lines at Paris’s Porte de Charenton during France’s third nationwide mobilisation against rising living costs and deteriorating public services. 📍Fourteen days since the first mass protests, reported arrests across the three main mobilisation days exceed 4,200 including 422 today by 8 p.m. Authorities counted 320,000 demonstrators nationwide; organisers claimed nearly 500,000. Most marches remained peaceful, but clashes erupted in several cities as 70,000 police and gendarmes were deployed across France. https://t.co/Rtnqhfqeut
— Eye OSINT (@AlexiaNoel94927) October 31, 2026
हालांकि, इस बार प्रदर्शनकारियों की संख्या पिछले सप्ताह के मुकाबले कम रही। उससे पहले सप्ताहांत में करीब 4.10 लाख और 17 अक्टूबर को लगभग 5.50 लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए थे। 17 अक्टूबर को कई शहरों में बड़े पैमाने पर दंगे और लूटपाट हुई थी। शनिवार को कई प्रदर्शनकारी हैलोवीन की वेशभूषा में भी नजर आए। शुरुआत में करीब 150 प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शाम होते-होते कई जगह हालात बिगड़ गए। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बाद में हुई हिंसा को असाधारण बताया। शनिवार रात तक देशभर में 560 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबर थी। हिंसा रोकने के लिए देशभर में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों और जेंडरमेरी जवानों को तैनात किया गया था। इनमें विशेष सुरक्षा इकाइयों के जवान भी शामिल थे। राजधानी पेरिस में करीब 70 हजार लोगों ने प्रदर्शन किया। दुकानों, सरकारी इमारतों और पर्यटन स्थलों को नुकसान से बचाने के लिए मार्च शहर के केंद्र के बजाय दक्षिण-पूर्वी बाहरी इलाके से निकाला गया।
🇫🇷 WATCH: Molotov cocktails hit police lines at Paris’s Porte de Charenton during France’s third nationwide mobilisation against rising living costs and deteriorating public services. 📍Fourteen days since the first mass protests, reported arrests across the three main mobilisation days exceed 4,200 including 422 today by 8 p.m. Authorities counted 320,000 demonstrators nationwide; organisers claimed nearly 500,000. Most marches remained peaceful, but clashes erupted in several cities as 70,000 police and gendarmes were deployed across France. https://t.co/Rtnqhfqeut
— Eye OSINT (@AlexiaNoel94927) October 31, 2026
फ्रांस के प्रदर्शनों में स्कूली छात्र व मजदूर संगठन भी शामिल
पोर्टे द बागनोले से शुरू हुआ मार्च शुरुआत में शांतिपूर्ण रहा। प्रदर्शनकारी हाथों में सरकार विरोधी नारे लिखी तख्तियां लिए हुए थे। लेकिन पोर्टे द शारांतों के पास पहुंचते ही स्थिति बिगड़ गई। काले कपड़े पहने और चेहरे ढके कुछ प्रदर्शनकारियों ने हथौड़ों से सड़क की ईंटें उखाड़ीं और पुलिस पर फेंकीं। सुरक्षा बलों की ओर एक आग लगाने वाला उपकरण भी फेंका गया। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया। पुलिस के मुताबिक, कई सौ उपद्रवियों ने अधिकारियों पर चीजें फेंकीं, जिसके बाद उन्हें कार्रवाई करनी पड़ी। लियोन में भी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जबकि टूलूज में बिना अनुमति निकाले गए मार्च को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया गया। फ्रांस के प्रदर्शनों में स्कूली छात्र, मजदूर संगठन और 'येलो वेस्ट' आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हुए। यह आंदोलन पिछले महीने शुरू हुआ था। शुरुआत में छात्रों ने स्कूलों की खराब इमारतों, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालयों में दाखिले की व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई थी।धीरे-धीरे इसमें मजदूर संगठन और दूसरे वर्ग भी शामिल हो गए। इनकी नाराजगी का बड़ा कारण महंगाई, महंगे मकान, बढ़ती आर्थिक असमानता और सरकार की नीतियां हैं। छात्र संगठनों ने मंगलवार और गुरुवार को स्कूलों और विश्वविद्यालयों को बंद कराने की योजना बनाई है। इसके अलावा 5 नवंबर को मजदूर संगठनों की ओर से प्रस्तावित देशव्यापी प्रदर्शन में शामिल होने की भी घोषणा की गई है।
Big demonstrations and clashes tonight in #Paris #Marseilles #Lyon #Grenoble #Berlin #Frankfurt #Köln #Hamburg #Zürich, and certainly several other cities. Winter might be hot in #Europe. #EuropeanSpring
— Kommunisierung.net (@Kommunisierung) October 31, 2026
जर्मनी में दुकानों में लूटपाट और आगजनी
फ्रांस के बाद जर्मनी में भी युवाओं का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। 'जेन जेड रेगेल्ट!' यानी 'जेनरेशन जेड सब संभाल लेगी' नाम के समूह के आह्वान पर 30 से ज्यादा शहरों में हजारों युवा सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों की मांगों में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, जलवायु संरक्षण और सस्ता जीवन शामिल था। युवाओं ने अनिवार्य सैन्य सेवा दोबारा लागू करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया। फ्रैंकफर्ट में कम से कम दो दुकानों में लूटपाट हुई और कई अन्य दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया। प्रदर्शन के दौरान आतिशबाजी किए जाने के कारण एक मार्च को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। कोलोन में प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर आतिशबाजी किए जाने के बाद पुलिस ने पानी की बौछार से भीड़ को हटाया। बर्लिन में प्रदर्शनकारियों ने बोतलें और अंडे फेंके, जबकि हैम्बर्ग में कुछ जगहों पर अवरोधक जलाए गए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए काली मिर्च वाले स्प्रे का इस्तेमाल किया। हालांकि, कई शहरों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण भी रहे। हिंसा की आशंका को देखते हुए जर्मनी में हजारों पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। बर्लिन में अतिरिक्त 1,500 जवान लगाए गए।
स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में गाड़ियां फूंकीं
स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शन की अपील के बाद सैकड़ों लोग लांगस्ट्रासे इलाके में जुटे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने चेहरे ढक रखे थे और आंखों की सुरक्षा के लिए विशेष चश्मे पहने थे। भीड़ ने आतिशबाजी शुरू की और हेल्वेटियाप्लात्ज की ओर बढ़ गई। इसके बाद कुछ लोगों ने सड़कों पर कूड़ेदान रखकर उनमें आग लगा दी। ई-बाइक, इलेक्ट्रिक स्कूटर और एक कार को भी आग के हवाले कर दिया गया। सार्वजनिक परिवहन केंद्र और आसपास की दुकानों के शीशे भी तोड़े गए। पुलिस के मुताबिक, आपातकालीन सेवाओं के कर्मचारियों पर पटाखे, बोतलें और पत्थर फेंके गए। हालात काबू करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार, आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। आधी रात के बाद एक चिकित्सा आपात स्थिति में पहुंची पुलिस गश्ती टीम पर भी भीड़ ने हमला किया। पुलिस को कुछ समय के लिए पीछे हटना पड़ा। रात करीब डेढ़ बजे स्थिति शांत हुई।
Big demonstrations and clashes tonight in #Paris #Marseilles #Lyon #Grenoble #Berlin #Frankfurt #Köln #Hamburg #Zürich, and certainly several other cities. Winter might be hot in #Europe. #EuropeanSpring
— Kommunisierung.net (@Kommunisierung) October 31, 2026
नीदरलैंड में 34 गिरफ्तार, स्पेन और इटली में भी अलर्ट
नीदरलैंड के हेग शहर में संभावित हिंसा और लूटपाट की आशंका के चलते पुलिस ने शनिवार को खरीदारी वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी। कई दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर अपनी दुकानों के शीशों पर सुरक्षा पट्टियां लगा दी थीं। दोपहर करीब तीन बजे दो समूहों के बीच झड़प के बाद पुलिस ने 34 लोगों को गिरफ्तार किया। दंगा नियंत्रण पुलिस ने दोनों समूहों को अलग किया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई। स्पेन के बार्सिलोना में भी पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की तैयारी की। सोशल मीडिया मंच टिकटॉक पर 'ब्लोकस' नाम के एक गुमनाम नेटवर्क ने नए प्रदर्शनों का आह्वान किया था। इससे पहले 24 अक्टूबर को बार्सिलोना में हुई हिंसा के बाद करीब 130 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें अधिकतर नाबालिग थे।
बेल्जियम, ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल में भी...
स्पेनिश पुलिस ने 30 अक्टूबर को इस नेटवर्क के कथित संस्थापक और मुख्य प्रचारक को भी गिरफ्तार किया था। अधिकारियों का आरोप है कि समूह छात्र प्रदर्शनों की आड़ में लूटपाट और हिंसा को बढ़ावा दे रहा था। इससे जुड़े छह अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया। इटली में मिलान, ट्यूरिन और बोलोन्या में पहले हुई झड़पों के बाद पुलिस सतर्क है। बेल्जियम, ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल में भी सोशल मीडिया के जरिए विरोध प्रदर्शन की अपील किए जाने की खबरें हैं। ऐसे में यूरोप के कई देशों की सरकारें किसी नए हिंसक घटनाक्रम को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रख रही हैं।