Edited By Rohini Oberoi,Updated: 12 Jan, 2026 05:09 PM

आधुनिक दौर में जहां दुनिया खुले विचारों की ओर बढ़ रही है वहीं कुछ अभिभावक आज भी बच्चों पर पाबंदियां थोपने के लिए पुराने और विवादित तरीकों का सहारा लेते हैं। फ्रांस से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां अपनी 15 साल की नाबालिग बेटी का जबरन...
Forced Virginity Test : आधुनिक दौर में जहां दुनिया खुले विचारों की ओर बढ़ रही है वहीं कुछ अभिभावक आज भी बच्चों पर पाबंदियां थोपने के लिए पुराने और विवादित तरीकों का सहारा लेते हैं। फ्रांस से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां अपनी 15 साल की नाबालिग बेटी का जबरन 'वर्जिनिटी टेस्ट' (कौमार्य परीक्षण) कराने की कोशिश करने पर माता-पिता को अदालत ने दोषी करार दिया है।
बॉयफ्रेंड का पता चलते ही पिता ने खोया आपा
घटना की शुरुआत मार्च 2025 में हुई जब एक पेशेवर बॉक्सर पिता को अपनी 15 वर्षीय बेटी के प्रेम प्रसंग (Affair) के बारे में पता चला। गुस्से में आकर पिता ने न केवल बेटी के साथ मारपीट की बल्कि उसकी 'शुद्धता' की पुष्टि करने की जिद पकड़ ली। माता-पिता अपनी बेटी को एक स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) के पास ले गए और डॉक्टर से उसकी वर्जिनिटी की जांच करने की मांग की। गनीमत यह रही कि डॉक्टर ने इस तरह के किसी भी परीक्षण को करने से साफ मना कर दिया क्योंकि फ्रांस में यह पूरी तरह अवैध है।
अदालत का कड़ा रुख: इरादा ही अपराध है
ला रोश-सुर-यॉन की पब्लिक प्रॉसिक्यूटर सारा हुए ने अदालत में स्पष्ट किया कि वर्जिनिटी टेस्ट की मांग करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने माता-पिता की इस दलील को खारिज कर दिया कि यह एक सामान्य मेडिकल चेकअप था।
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अदालत का फैसला
नाबालिग को अपनी वर्जिनिटी साबित करने के लिए उकसाने के जुर्म में मां को 3 महीने की निलंबित जेल (Suspended Sentence) की सजा सुनाई गई। वहीं पिता को हिंसा करने और अभिभावक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों में विफल रहने के लिए 6 महीने की निलंबित सजा और दो साल के प्रोबेशन पर रखा गया है।
वर्जिनिटी टेस्ट पर क्यों है प्रतिबंध?
फ्रांसीसी कानून के अनुसार वर्जिनिटी टेस्ट को अपमानजनक और भेदभावपूर्ण माना जाता है। अदालत ने कहा कि किसी बच्चे की सुरक्षा, स्वास्थ्य और नैतिकता को खतरे में डालना परवरिश का हिस्सा नहीं हो सकता। प्रॉसिक्यूटर ने जोर देकर कहा कि भले ही टेस्ट नहीं हुआ लेकिन माता-पिता का ऐसा इरादा रखना ही सजा के लिए पर्याप्त है। यह मामला दुनिया भर के उन माता-पिता के लिए एक कड़ा संदेश है जो अपनी दकियानूसी सोच बच्चों पर जबरन थोपते हैं।