Edited By Mansa Devi,Updated: 28 Jan, 2026 12:56 PM

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका लगातार अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है और साफ संकेत दे रहा है कि वह किसी भी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी...
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका लगातार अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है और साफ संकेत दे रहा है कि वह किसी भी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के करीब अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की है, जिसे ट्रंप ने “बड़ा आर्माडा” करार दिया है। इस कदम का उद्देश्य तेहरान पर दबाव बनाना और उसे बातचीत के लिए तैयार करना बताया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद मिडिल ईस्ट में हालात पर पूरी दुनिया की नजरें टिक गई हैं।
दबाव की रणनीति या युद्ध की तैयारी?
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस सैन्य तैनाती का मकसद सीधे युद्ध नहीं, बल्कि ईरान पर दबाव बनाना है ताकि तेहरान बातचीत की मेज पर आए। हालांकि, जिस पैमाने पर सेना, युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं, उससे यह साफ है कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहता है।
मिडिल ईस्ट में उतारा गया USS अब्राहम लिंकन
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अपने सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स में से एक USS अब्राहम लिंकन को तैनात किया है। यह न्यूक्लियर पावर से चलने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसे अमेरिकी नौसेना की सबसे घातक सैन्य ताकत माना जाता है। इसके साथ कई आधुनिक युद्धपोत भी भेजे गए हैं, जिनमें टोमाहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस जहाज शामिल हैं।
फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टरों की भारी मौजूदगी
USS अब्राहम लिंकन पर कैरियर एयर विंग 9 तैनात है। इसमें अत्याधुनिक हथियारों से लैस कई तरह के विमान शामिल हैं। इनमें
F-35C स्टील्थ फाइटर जेट
F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट मल्टी-रोल फाइटर
EA-18G ग्रोलर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान
E-2D हॉकआई निगरानी और कमांड विमान
MH-60 हेलिकॉप्टर
हजारों सैनिक और मिसाइल सिस्टम तैनात
इस पूरे स्ट्राइक ग्रुप के साथ करीब 5700 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। दर्जनों फाइटर जेट्स, निगरानी ड्रोन और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें इस सैन्य बेड़े का हिस्सा हैं। यह तैनाती अमेरिका की उस रणनीति को दिखाती है, जिसके तहत वह ईरान को साफ संदेश देना चाहता है कि किसी भी टकराव की कीमत भारी पड़ सकती है।
मिडिल ईस्ट पर टिकी दुनिया की नजर
अमेरिका की इस बड़ी सैन्य तैनाती के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और गहरा गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में हालात और संवेदनशील हो सकते हैं। अब देखना यह होगा कि यह शक्ति प्रदर्शन बातचीत की राह खोलता है या हालात और बिगड़ते हैं।